कुवि मीडिया संस्थान में धूमधाम से मनाया गया शिक्षक दिवस
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका सर्वाेपरि है क्योंकि आप किसी भी प्रकार के क्षेत्र में कार्यरत हो आपको उस कार्य का हुनर, कार्य के प्रति समर्पण, समाज के प्रति समर्पण , राष्ट्र के प्रति अपनी जवाबदेही की भूमिका का आत्मबोध आपके द्वारा प्राप्त शिक्षा से ही मिलती है। यह उद्गार जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रोफेसर महासिंह पूनिया ने संस्थान के सभागार में गत दिवस ‘शिक्षक-दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहे। निदेशक प्रोफेसर महासिंह पूनिया ने कहा कि वे वर्तमान में जिस मुकाम है उसका संपूर्ण श्रेय उनके परिवार और शिक्षकों को ही जाता है क्योंकि परिवार, शिक्षक की भूमिका आपके जीवन को एक नई दिशा देती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को यह गहन अध्ययन से समझना चाहिए कि किसी विकसित समाज, विकसित राष्ट्र के पीछे का विचार शिक्षक के द्वारा दी गई अच्छी शिक्षा से ही संभव हुआ है और भविष्य में होता रहेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि संस्थान के समस्त शिक्षक आपके परिवार की तरह ही है क्योंकि वे आपके उज्ज्वल भविष्य निर्माण के लिए कार्यरत है, इसलिए अपने स्वयं और देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए अपने शिक्षकों से पाठ्यक्रम के अतिरिक्त अन्य भी प्रत्येक दिन सीखने का प्रयास करें क्योंकि आप जितना अधिक जिज्ञासु प्रवृति से अपने शिक्षकों से जानने का प्रयास करेगे वे उससे अधिक ही आपको सिखाने का प्रसास करे।
शिक्षक-दिवस पर संस्थान में संचालित जनसंचार, मल्टीमीडिया, प्रिंटिंग एवं पैकेजिंग, ग्राफिक्स एंड एनिमेशन के विद्यार्थियों ने अपने अपने शिक्षकों से डांस, कविता, डॉयलाग, कहानी, ग्रुप डांस, गीत-संगीत इत्यादि मनोरंजन के साथ उनसे सीधे संवाद किया। इस अवसर समस्त कोर्स के विद्यार्थियों ने बारी-बारी से स्टेज का सफल संचालन किया और अपने शिक्षकों के साथ उनकी टैलेंट प्रतियोगिता में ताल से ताल मिलाई। इस अवसर पर संस्थान की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मधुदीप ने विद्यार्थियों दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की बधाई दी और कहा कि जीवन में प्रत्येक कार्य आपके सफल जीवन की सीढ़ी है बशर्ते आप उसे कार्य को बेहद लग्न और खुशी पूर्वक करो, क्योंकि कार्य के प्रति समर्पण ही सफलता है। डॉ. आबिद अली ने कहा कि विद्यार्थीगण प्रत्येक पल अपने अंदर छुपी प्रतिभा को किसी ने किसी कार्य से बाहर निकाले क्योंकि आप कार्य की कोई तारीफ कोई ना करे भले ही लेकिन अपने अंदर जरूरी संतुष्टि होनी चाहिए की मैने अपना कार्य किया। इस अवसर पर संस्थान के समस्त शिक्षक, शोधार्थी, और विद्यार्थिगण उपस्थित रहे।