महंत राजेंद्र पुरी ने करवाया श्रद्धालुओं से बुजुर्गों की सेवा एवं सम्मान का प्रण
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार के महंत राजेंद्र पुरी ने श्राद्ध पक्ष के चलते वीरवार को कहा कि सनातन धर्म में माता-पिता की सेवा और श्राद्ध को बहुत महत्व दिया जाता है। माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना जाता है। उन्होंने कहा कि श्राद्ध तर्पण से पूर्व जीते जी अपने बुजुर्गों व माता पिता की सेवा को ही महत्व दिया गया है। उन्होंने इस मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं से बुजुर्गों की सेवा एवं सम्मान का संकल्प भी करवाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री गणेश ने भी माता पिता की सेवा का संदेश दिया है। भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों में माता पिता की सेवा एवं बुजुर्गों के सम्मान से बढ़ कर कोई पूजा नहीं हैं। महंत राजेंद्र पुरी ने बताया कि श्राद्ध करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। श्राद्ध से दीर्घायु, पुत्र-पौत्रादि, यश, स्वर्ग, पुष्टि, बल, लक्ष्मी, सुख-साधन, और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि अपने बुजुर्गों के प्रति, पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा का भाव ही श्राद्ध कहलाता है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण भी गीता में कहते हैं कि जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्र ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर को त्यागकर दूसरे नए शरीर को प्राप्त होता है। इस तरह से जब नया शरीर धारण कर लेते हैं तो यमलोक में न होकर जीवात्मा नए शरीर में पृथ्वी लोक पर ही रहती है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि जीते जी अपने माता-पिता की अवहेलना और अनादर करने और मृत्योपरांत उनका श्राद्ध कर्म व तर्पण करने के आखिर क्या कोई मायने हो सकते हैं। जिस माता-पिता ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, पढ़ना-लिखना सिखाया और उसका पूरा जीवन निर्माण किया, उसी माता-पिता को वृद्धावस्था में अपमानजनक जिंदगी जीने को मजबूर करना कैसे उचित हो सकता है। ऐसा पुत्र अगर बाद में धूमधाम से श्राद्ध कर्म करें तो भी वह आडंबर, दिखावा व ढोंग ही है। अच्छा होगा जीते जी बुजुर्गों को सम्मान दें, उन्हें प्रेम दें। तब जो श्रद्धा होगी वही श्राद्ध का रूपक होगी, जीते जी खुश करके आशीर्वाद प्राप्त करना। इस अवसर पर बबिता शर्मा, दीपिका सिंह, निशा देवी, अमित, कपिल अरोड़ा, सुषमा, मयंक शर्मा, कृतिका गुलाटी, संजना, अजय राठी, विजय राठी व अक्षय राठी इत्यादि भी मौजूद रहे।