एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पंडित मदन मोहन मालवीय अध्यापक प्रशिक्षण केंद्र के तत्वाधान में आयोजित 30वें ऑनलाइन राष्ट्रीय शिक्षा नीति संवेदीकरण व अभीमुखता कार्यक्रम के पहले दिन “भारतीय ज्ञान प्रणाली” पर चर्चा हुई। पहले दिन के पहले सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. आलोक कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, सरला बिड़ला विश्वविद्यालय, रांची ने प्रतिभागियों को बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली हजारों वर्षों की बौद्धिक, दार्शनिक और व्यावहारिक परंपरा है, जिसमें वेद, उपनिषद, पुराण, आयुर्वेद, स्थापत्य, कला और न्यायशास्त्र जैसी विधाएँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल भौतिक उन्नति नहीं बल्कि मोक्ष, नैतिक जीवन और सामाजिक सामंजस्य है। डॉ. कुमार ने पश्चिमी और भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय दृष्टिकोण अनुभव और आत्मानुभूति पर आधारित है। उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्रों और न्याय सिद्धांतों की आज के शासन और कानूनी शिक्षा में प्रासंगिकता पर बल दिया। अंत में उन्होंने शिक्षा को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर भारतीय परंपरा के मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पहले दिन के दूसरे सत्र में प्रो. राजीव कुमार झा, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर ने प्रतिभागियों को बताया की भारतीय विधि परंपरा का उद्देश्य केवल दंड नहीं बल्कि धर्म, न्याय और सामाजिक सामंजस्य की स्थापना था। उन्होंने वर्तमान विधि शिक्षा को औपनिवेशिक दृष्टिकोण से मुक्त कर भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में, कोर्स समन्वयक डॉ प्रियंका चौधरी ने दोनों वक्ताओं का उनके प्रेरणादायक व्याख्यानों के लिए आभार व्यक्त किया तथा प्रो. प्रीति जैन, निदेशक, मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद प्रकट किया।