Home Chandigarh पंचकूला-पिंजौर में संघ शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव,20 स्थानों पर कार्यक्रम,गणवेश में रहे स्वयंसेवक

पंचकूला-पिंजौर में संघ शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव,20 स्थानों पर कार्यक्रम,गणवेश में रहे स्वयंसेवक

by ND HINDUSTAN
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संघ शताब्दी वर्ष में पंचकूला में  पिंजौर सहित 20 स्थानों पर कार्यक्रम,गणवेश में मौजूद रहे स्वयंसेवक

10 स्थानों पर हुआ पथ संचलन, दस जगह शस्त्र पूजन

एनडी हिंदुस्तान संवाददाता/दीपक शर्मा

पंचकूला/पिंजौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को पंचकूला सेक्टर 6,बेलाविस्टा के समक्ष और पिंजौर नगर में विजयादशमी उत्सव, शस्त्र पूजन और पथ संचलन के कार्यक्रम अनुशासन, उत्साह और देशभक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुए। बेलाविस्टा के समक्ष आयोजित कार्यक्रम  में बतौर मुख्यातिथि सेवानिवृत्त आईएएस श्याम सुंदर ने शिरकत की,जबकि मुख्य वक्ता के रुप में जिला संघचालक बेअंत सिंह परमार मौजूद रहे।दोनों कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों ने गणवेश में नगर के दस स्थानों पर पथ संचलन किया, वहीं दस स्थानों पर शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राकेश, प्रबंध निदेशक, सेपियंट स्कूल तथा मुख्य वक्ता भूपेश कुमार, प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख रहे। नगर संघ संचालक संजीव मंचासीन रहे।

मुख्य वक्ता भूपेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि विजयादशमी का पर्व सत्य की असत्य पर विजय, धर्म की अधर्म पर जीत और आत्मबल के जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने इतिहास में विरोध कालखंड से लेकर अपेक्षा कालखंड तक समाज में संगठन, सेवा और संस्कार की भावना को प्रबल किया है।उन्होंने बताया कि देश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने में संघ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। योग, स्वास्थ्य सेवाओं, विज्ञान, शिक्षा और जीडीपी वृद्धि के क्षेत्र में संघ से जुड़े स्वयंसेवकों ने निरंतर योगदान दिया है।

भूपेश कुमार ने कहा कि किसी भी आपदा में संघ सदैव अग्रणी रहता है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा में स्वयंसेवकों ने सेवा कार्यों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने 1962 और 1965 के भारत-पाक युद्धों के दौरान संघ के योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि राष्ट्रहित में किए गए कार्यों के चलते संघ को गणतंत्र दिवस की परेड में आमंत्रण प्राप्त हुआ।

मुख्य वक्ता ने बेअंत सिंह परमार ने ‘पंच परिवर्तन’ — स्वदेशी, स्वभाषा, स्वसंस्कृति, स्वकर्तव्य और स्वाभिमान — के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र का आधार बन सकता है। आत्मशक्ति और आत्मनिर्भरता से ही भारत विश्वगुरु के मार्ग पर अग्रसर होगा। स्वयंसेवकों ने पारंपरिक रूप से शस्त्र पूजन किया। नगर में पूरे दिन विजयादशमी उत्सव का उल्लास छाया रहा।

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