आरएसएस विश्व की सबसे बडी नॉन पोलिटिक्ल संस्थाः भारत गर्ग
एनडी हिन्दुस्तान
जगाधरी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रविवार को जगाधरी शहर संघमय हो गया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष व विजय दशमी उत्सव के उपलक्ष्य में रविवार को 20 मंडलों में पथ संचलन व शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इन कार्यक्रमों में पांच हजार से ज्यादा स्वयं सेवकों छह हजार स्वयं सेवकों व तीन हजार से ज्यादा नागरिकों ने भाग लिया। पथ संचलन के दौरान जहां स्वयं सेवकों ने अनुशासन, संगठन व राष्ट्र भक्ति का प्रदर्शन किया। पथ संचलन के दौरान विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्प वर्षा की और भारत माता के जयकारों के साथ स्वागत किया।
जगाधरी के एसडी सीसे स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवी एवं उद्योगपति भारत गर्ग मुख्य अतिथि रहे। जबकि अंबाला विभाग कार्यवाह महेंद्र चौहान मुख्य वक्ता रहे। मक्खन लाल शिबूमल धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवी अश्वनी सिंगला मुख्य अतिथि व सह प्रांत मुख्यमार्ग प्रमुख राजबीर मुख्य वक्ता रहे। वृद्धाश्रम में आयोजित कार्यक्रम में महाराजा अग्रसेन कॉलेज प्रिंसिपल करूणा मुख्य अतिथि रहीं। जबकि सह विभाग कार्यवाह राजकुमार मुख्य वक्ता रहे।
समाजसेवी भारत गर्ग ने कहा कि आरएसएस आज विश्व की सबसे बडी नॉन पोलिटिक्ल संस्था है। जो निस्वार्थ भाव से देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि संघ स्थापक डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार ने उस समय महसूस किया था कि देश के आजाद होने के बाद उसे कैसे चलाएंगे। देशभक्ति व निस्वार्थ भाव से काम करने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 1925 में आरएसएस की स्थापना की। वर्ष 1939 में उनके पिता जय भगवान, शाहाबाद से आरएसएस की जोत जगाधरी लेकर आए। इसके बाद उन्होंने समाजसेवी जयप्रकाश, राजेंद्र व दर्शनलाल जैन के साथ मिलकर इसे वटवृक्ष बनाने में योगदान दिया।
संघ के लिए राष्ट्र सर्वोपरिः अश्वनी सिंगला
समाजसेवी अश्वनी सिंगला ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज के नए भारत के निर्माण तक संघ ने अपनी विचारधारा और कर्म के माध्यम से राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखा। देश में संकट के समय संघ के स्वयंसेवकों ने हर मोर्चे पर सेवा और सहयोग का परिचय दिया। चाहे वह प्राकृतिक आपदाएं हों, युद्धकाल की स्थितियां हों या सामाजिक चुनौतियां। 100 वर्षों की इस यात्रा में संघ ने यह साबित किया है कि विचार, अनुशासन और संगठन शक्ति के बल पर समाज और राष्ट्र में व्यापक परिवर्तन संभव है। बदलते समय के साथ संघ ने अपनी कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण में भी बदलाव किया, जिससे वह नई पीढ़ी के लिए भी प्रासंगिक बना हुआ है।
संघ का उद्देश्य देश को सशक्त व संस्कारित राष्ट्र बनानाः करूणा
महाराजा अग्रसेन कॉलेज प्रिंसिपल करूणा ने कहा कि संघ की स्थापना का उद्देश्य भारत को एक संगठित, सशक्त और संस्कारित राष्ट्र के रूप में पुनः स्थापित करना रहा है। पिछले 100 वर्षों में संघ ने समय और परिस्थिति के अनुसार स्वयं को बदला, विकसित किया और देश के हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रारंभ में शाखाओं के माध्यम से केवल चरित्र निर्माण और संगठन पर ध्यान देने वाला संघ आज शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आंदोलन, सामाजिक समरसता और सेवा कार्यों जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय है। संघ से प्रेरित संगठनों का आज व्यापक नेटवर्क है, जो समाज के हर वर्ग तक पहुंच बना रहे हैं।
इन मंडलों में हुए कार्यक्रमः
देवधर मंडल, प्रताप नगर मंडल, भूडकलां मंडल, रंजीतपुर मंडल, सलेमपुर कोही मंडल, साढौरा मंडल, रसूलपुर मंडल, लाहडपुर मंडल, रत्तुवाला मंडल, व्यासपुर मंडल, मछरौली मंडल, मलिकपुर बांगर मंडल, खारवन मंडल, याकुबपुर मंडल, बलौली मंडल, ललहाडी मंडल, जगाधरी स्थित गुरू गोविंद सिंह उपनगर, शिवाजी उप नगर व महाराणा प्रताप उपनगर में पथ संचलन व शस्त्र पूजन कार्यक्रम हुए।