कुवि में राष्ट्रीय एकता शिविर का शुभारंभ
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय एकता शिविर का शुभारंभ अत्यंत उत्साह और उल्लास के साथ हुआ। देश के 17 विभिन्न राज्यों से 200 स्वयंसेवक एवं 20 कार्यक्रम अधिकारी इस शिविर में भाग ले रहे हैं। शिविर का उद्देश्य युवाओं में डिजिटल साक्षरता, राष्ट्रीय एकता एवं सेवा भाव को प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ हवन के साथ हुआ, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को हवन की महत्वत्ता के बताया गया। हवन भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और वैज्ञानिक अनुष्ठान है। यह शुद्धिकरण, ऊर्जा-संतुलन और सकारात्मकता का माध्यम है। इसके महत्व को हम आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक तीनों दृष्टियों से समझ सकते हैं। इसी दौरान सभी प्रतिभागियों का पंजीकरण किया गया । उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा तथा विशिष्ट अतिथि डीन छात्र कल्याण प्रो. ए. आर. चौधरी ने शिविर में शिरकत की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि यह शिविर युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व और एकता की भावना सीखने का सर्वोत्तम अवसर प्रदान करता है। कई प्रेरणादायक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर उनके विचारों को आत्मसात करना चाहिए। हमें सेवा भाव और त्याग के आनंद को समझना चाहिए और कहा कि सच्चा सुख दूसरों की मदद करने में है। प्रो सचदेवा ने राष्ट्रीय सेवा योजना के मूल मंत्र नाट मी, बट यू को हर स्वयंसेवक को अपने जीवन का मार्गदर्शन बनाना चाहिए। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवकों की मिसालें देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों ने सड़क दुर्घटना, कोविड-19 महामारी, और बाढ़ के दौरान निःस्वार्थ भाव से लोगों की सहायता करते रहे हैं।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने “संपूर्ण भाव से कार्य करना और फल की चिंता न करना” का संदेश देते हुए भगवद्गीता के प्रथम श्लोक का उल्लेख किया और कहा कि यह पवित्र भूमि कुरुक्षेत्र वह स्थान है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्मयोग का संदेश दिया था। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में भी अवगत कराया। प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि आप एक परिवार की तरह रहें, सेवा, अनुशासन और त्याग की भावना से कार्य करें तथा भारत के युवा के रूप में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। विशिष्ठ अतिथि छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए. आर. चौधरी ने कुरुक्षेत्र की महत्वत्ता के बारे में बताया और सरस्वती नदी के उदगम के बारे में भी अवगत कराया।
सांस्कृतिक संध्या में विभिन्न राज्यों के स्वयंसेवकों ने अपनी-अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। महाराष्ट्र की समूह नृत्य प्रस्तुति, कर्नाटक का सेमी-क्लासिकल गीत, झारखंड का स्वागत गीत तथा असम की एकल नृत्य प्रस्तुति ने मंच को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ आनंद ने सभी स्वागत किया एवं एकता शिविर की रूप रेखा के बारे में सभी को अवगत कराया । उन्होंने बताया कि इस शिविर में कर्नाटक, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, असम, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ एवं हरियाणा से राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। सभी के रहने, खाने ओर अन्य कार्यक्रमों के लिए विशेष ध्यान रखना गया है। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उप-समन्वयक डॉ. नीरज बातिश ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों, कार्यक्रम अधिकारियों एवं आयोजकों की सराहना करते हुए एनएसएस की भावना और शिविर के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने हरियाणा उच्च शिक्षा निदेशालय और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार का आभार व्यक्त किया तथा सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं प्रेषित की। इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर.चौधरी, कार्यक्रम अधिकारी अमनदीप कौर, भुनेश्वर लाल साहू, महेश कुमार, पी.वर्मा, शरबत हुसैन, नमनि भुइंयां, मंजू कुशवाह, महेश कुमार शेट्टी, संजय, कुमार गौतम, जगदीप सिंह तुली, समीर रॉय, विशाल एम. दशमुखा, कविता मेहता, स्वरित शर्मा, रामनिवास, सविता मलिक, मीनू, अमनदीप, कुमारी नीतू रानी, मोनिका, डॉ. राजरतन, डॉ. सतीश, डॉ. ज्योति, डॉ. निधि माथुर, स्वयंसेवक कुलदीप, सुमित, मीनाक्षी कांत, जीतेल, आदित्य, गरिमा,हरमन आदि मौजूद रहे।