Home Kurukshetra News यूजीसी प्रायोजित पुनश्चर्या पाठ्यक्रम “मानव रूपांतरण, विधि एवं मानवाधिकार” का सफल समापन

यूजीसी प्रायोजित पुनश्चर्या पाठ्यक्रम “मानव रूपांतरण, विधि एवं मानवाधिकार” का सफल समापन

by ND HINDUSTAN
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एनडी हिन्दुस्तान

कुरुक्षेत्र।कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में  यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (यूजीसी-एमएमटीटीसी), पूर्व में यूजीसी-एचआरडीसी, द्वारा विधि विभाग के सहयोग से आयोजित दो-सप्ताह अंतर्विषयी पुनश्चर्या पाठ्यक्रम “मानव रूपांतरण, विधि एवं मानवाधिकार (कानून एवं समाज विज्ञान)” का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।

पाठ्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रोफेसर अपर्णा मल्होत्रा, लाइफ मेंबर, इंडियन लॉ इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली ने “महानिदेशक नागर विमाननः संगठन एवं कार्य” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने डीजीसीए की संरचना, विमानन सुरक्षा और प्रशासनिक कानून के मानवीय पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में प्रतिभागियों के लिए एमसीक्यू मूल्यांकन एवं फीडबैक गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें सीख मूल्यांकन एवं सुझाव संकलन का उद्देश्य सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। तृतीय सत्र में प्रोफेसर आर. के. सिंह, निदेशक, सेकंड कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय ने “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अंतर्गत अन्वेषण” विषय पर व्याख्यान देते हुए स्पष्ट किया कि संविधान प्रदत्त गरिमा, स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता के सिद्धांत अन्वेषण की प्रक्रिया के मूल में होने चाहिए।

पाठ्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. रत्तन सिंह, कुलपति, जगत गुरु नानक देव पंजाब स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, पटियाला तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री मानव बंसल, आयुक्त आयकर (डीआर)-2, आयकर अपीलीय अधिकरण, चंडीगढ़ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ कुल गीत से हुआ। डॉ. आरुषि (सह-संयोजक) ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। प्रो. प्रीति जैन, निदेशक, यूजीसी-एमएमटीटीसी ने पाठ्यक्रम की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डॉ. प्रियंका चौधरी (सह-संयोजक) ने दो सप्ताह के पाठ्यक्रम का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विशिष्ट अतिथि मानव बंसल ने मानवाधिकार जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि प्रो. रत्तन सिंह ने विधि शिक्षा में मानवीय मूल्यों के समावेश की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रतिभागियों को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। डॉ. नीरज बातिश, उप निदेशक, यूजीसीएमएमटीटीसी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। 

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