देश में चुनाव पर चार लाख करोड़ से सात लाख करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान
एक साथ चुनाव होने से 40 दिन अतिरिक्त कार्य दिवसों से दो लाख 18 हजार 400 करोड़ रूपये की अतिरिक्त पूंजी उत्पन्न होगी- बोले धनखड़
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव धनखड़ ने गुजरात के वापी में यातायात उद्यमियों को किया संबोधित
विकसित भारत मोदी जी का संकल्प और हर भारतीय का सपना – धनखड़
एनडी हिन्दुस्तान
चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव औमप्रकाश धनखड़ ने गुजरात के वापी में यातायात उद्यमियों को एक राष्ट्र एक चुनाव विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि एक राष्ट्र- एक चुनाव विकसित भारत के संकल्प को गति प्रदान करेगा। उन्होने कहा कि रामनाथ कोविंद कमेटी का अनुमान है कि देश में चुनावों पर चार लाख करोड़ से सात लाख करोड़ रूपये खर्च होते हैं। यदि एक साथ चुनाव हो तो लगभग एक तिहाई की बचत हो सकती है यानी डेढ़ लाख करोड़ रूपये। कई राज्यों के वार्षिक बजट से भी अधिक की धनराशि। यह बचत राशि तेजी से देश के विकास का इंजन बन सकती है।
मोदी जी के संकल्प के साथ देश के प्रत्येक नागरिक की आकांक्षा है कि भारत विकसित राष्ट्र बने। इसके लिए जरूरी है कि विकास में अवरोधों को दूर करना। देश में बार बार चुनाव होने से आचार संहिता के कारण लगभग 80 दिन बाधित होते हैं। विधान सभा और लोकसभा चुनाव एक साथ होने से 40 कार्य दिवस अतिरिक्त मिलेंगे। वर्तमान में हमारी अर्थव्यवस्था की गति एक लाख करोड़ रूपये प्रतिदिन है। यदि चुनाव आचार संहिता का 20 प्रतिशत असर भी पड़े तो प्रतिदिन 20 हजार करोड़ रूपये की विकास गति धीमी पड़ जाती है। कुल 40 दिनों की आचार संहिता का यह आंकड़ा आठ लाख करोड़ रूपये तक पहुंचता है। जो देश की आर्थिक प्रगति में अवरोध है। चुनावों में डेढ़ करोड़ कर्मचारी कम से कम सात दिन लगाते हैं। जो लगभग साढ़े दस करोड़ कार्य दिवस बनते हैं। इसके अतिरिक्त तीन से चार गुणा राजनीतिक कार्यकर्ता भी अपना समय लगाते हैं। एक बार चुनाव होने से होने से साढ़े दस करोड़ कार्य दिवस बचेंगे। अगर एक व्यक्ति की उत्पादन क्षमता 1600 रूपये प्रतिदिन मानी जाए तो दो लाख 18 हजार 400 करोड़ रूपये की देश की अर्थव्यवस्था के अतिरिक्त उत्पन्न हो सकती है।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्री धनखड़ ने कहा कि पांच वर्ष में एक बार चुनाव देश की राजनीति में स्थिरता पैदा करेंगे। जो लोकतंत्र में विकास की गारंटी है। बार बार चुनाव में लोकप्रिय घोषणा पत्र बनाने का दबाव राजनीतिक दलों पर कम होगा। लोकलुभावन वादों से पूंजीगत बजट पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पूंजीगत बजट देश व प्रदेश के विकास इंजन बनता है। पैसे के चक्र को छह बार घुमाता है। जबकि राजस्व या फिक्सड डिपोजिट केवल दो बार घूमाता है। उन्होंने कहा कि आप सभी उद्यमी है अर्थव्यवस्था को बेहतर ढंग से समझते हैं। आप सभी जानते हैं बार बार आचार संहिता के कारण विकास कार्य रखते हैं, टेंडर प्रक्रिया रूक जाती हैं। जिससे हर वर्ग व व्यक्ति प्रभावित होता है।
धनखड़ ने कहा कि चुनाव आयोग और पर्यावरण विशेषज्ञ भी ग्रीम चुनाव की बात कर रहे हैं। चुनावों ध्वनि प्रदूषण, पेपर अत्यधिक प्रयोग, पोस्टर होर्डिंगस में उपयोग होने वाला प्लास्टिक जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है। ये गतिविधियां ने केवल मानव,वन्यजीव, पेड़ पौधों के जीवन के लिए नुकसानदेह है बल्कि आर्थिक रूप से भी हानि पंहुचाती हैं।
धनखड़ ने जोर देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था देश की प्रगति का इंजन है। विकसित भारत मोदी जी का संकल्प और हर भारतीय सपना है। एक राष्ट्र, -एक चुनाव इसका एक प्रबल माध्यम है। कार्यक्रम में संजय शर्मा,शिल्पेश देसाई, नरेश सहित बड़ी संख्या में उद्यमी मौजूद रहे।