Home haryana विकसित भारत की राह में स्वदेशी महोत्सव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण – कार्तिकेय शर्मा

विकसित भारत की राह में स्वदेशी महोत्सव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण – कार्तिकेय शर्मा

by ND HINDUSTAN
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स्वदेशी महोत्सव 2025 में राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने की सहभागिता

एनडी हिन्दुस्तान

पंचकूला । पंचकूला के सेक्टर-5 परेड ग्राउंड में आयोजित स्वदेशी महोत्सव 2025 में राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने हरियाणा के पुरातन समाज की झलक देखी और स्वदेशी को बढ़ावा देने वाली विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया।

महोत्सव की सराहना करते हुए सांसद कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि यह एक अत्यंत सुंदर स्वदेशी मेला है और पहले ही दिन 40 हजार से अधिक लोग इसे देखने पहुंचे थे । उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में हरियाणा की विरासत और संस्कृति की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है, जिसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा किया गया यह प्रयास सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए स्वदेशी के आह्वान को धरातल पर उतारने का प्रयास यहां स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। छोटे उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रम लगातार होते रहने चाहिए, क्योंकि इससे उन वर्गों को भी प्रोत्साहन मिलता है जो अक्सर पीछे रह जाते हैं।

मनरेगा से जुड़े विधेयक पर बोलते हुए सांसद ने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत योजना का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ रखा गया है और कार्य दिवस बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जी भी भगवान श्री राम के अनुयायी थे और उन्हें भी इस पर कोई आपत्ति नहीं होती। कांग्रेस इस विषय को तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ने का प्रयास कर रही है, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम के नाम पर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हरियाणा में सभी जाति, समुदाय और धर्म के लोग एक-दूसरे का अभिवादन “राम-राम” कहकर करते हैं। देश की जनता लगातार कांग्रेस को जवाब दे रही है, लेकिन वे इसे समझना नहीं चाहते।

हरियाणा विधानसभा सत्र के दौरान मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में ऐसी घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है। आज देश में सबसे बड़ी युवा आबादी है और यह सोचना जरूरी है कि हम युवाओं को किस प्रकार का उदाहरण दे रहे हैं। लोकतंत्र में सभी को अधिकार हैं, लेकिन उसकी मर्यादा भी उतनी ही जरूरी है।बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पीड़ित परिवारों के प्रति उन्होंने संवेदना व्यक्त की और कहा कि यदि ऐसी घटनाएं घटती हैं तो भारत को पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर एकजुट होकर इसकी निंदा करनी चाहिए।अंत में उन्होंने कहा कि विकसित भारत की राह में स्वदेशी महोत्सव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में नींव का पत्थर साबित होगा।

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