Home Karnal news नए साल में मिलेंगी एमएचयू को मेन कैंपस की सौगात, 421 करोड़ से निर्माण कार्य: प्रो. सुरेश मल्होत्रा

नए साल में मिलेंगी एमएचयू को मेन कैंपस की सौगात, 421 करोड़ से निर्माण कार्य: प्रो. सुरेश मल्होत्रा

by ND HINDUSTAN
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मैन कैंपस में बनेंगे 9 विभाग

उत्तर भारत के किसानों को पहुंचेगा फायदा

एनडी हिन्दुस्तान

करनाल। नए साल 2026 में महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी करनाल का मैन कैंपस नए बस स्टैंड उचानी करनाल में करीब 421 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार होगा। मैन कैंपस का निर्माण कार्य 50 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, निर्माण कार्य पूरा करने के लिए तेजी से काम चल रहा है। महाराणा प्रताप हॉर्टिक्लचर यूनिवर्सिटी करनाल के माननीय कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 9 दिसंबर 2024 को पानीपत से एमएचयू के मैन कैंपस का वर्चुअली शिलान्यास किया था, कैंपस का निर्माण कार्य करीब 421 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगा। कैंपस में 9 विभाग जिनमें फल विभाग, सब्जी विभाग, फल व मसाले विभाग एवं औषधीय फसलें विभाग, कटाई उपरांत प्रबंधन विभाग, मधुमक्खी पालन विभाग, मशरूम अनुसंधान विभाग, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बेसिक सांइस एवं सोशल साइस विभाग आदि शामिल होंगे। उत्तर भारत के किसानों को होगा फायदा उन्होंने कहा कि एमएचयू का मैन कैंपस बन जाने के बाद हरियाणा प्रदेश के किसान भाई ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के अंतर्गत आने वाले राज्य पंजाब, हिमाचल प्रदेश, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि के किसान भाईयों के जीवन में परिवर्तनकारी साबित होगा। किसान भाईयों को बागवानी खेती के संबंध में नवीतनम जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, किसान भाईयों को उन्नत किस्मों का बीज, पौध आदि उपलब्ध करवाई जा सकेंगी। इसके अलावा एमएचयू के प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रहे 6 अनुसंधान केंद्रों से भी बागवानी खेती के बारे में हर सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। 2 पैकेज में चल रहा मैन कैंपस का निर्माण माननीय कुलपति प्रो. सुरेश ने बताया कि यूनिवर्सिटी का निर्माण 65 एकड़ में 2 पैकेज में एक साथ चल रहा है। वि.वि. का सबसे पहला फायदा किसान भाईयों को मिलेगा, विश्वविद्यालय बागवानी फसलों पर अनुसंधान कार्य कर रहा है, नई किस्मों का विकास करेगा। फसल सुरक्षा पोषण प्रबंधन, फसल प्रंस्सकरण, वैल्यू ऐबल उत्पादन बनाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विश्व स्तरीय तकनीकों पर शोध कर उन्हें उत्तर भारतीय जलवायु के अनुकूल बनाकर किसान भाईयों तक पहुंचाएगा, जिससे किसान भाई नई तकनीक अपनाकर उच्च गुणवत्ता वाली फसलें तैयार करेंगे, जिससे उन्हें बाजार में पहले की अपेक्षा बेहतर दाम मिल सकेंगे। जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी, जो उनके जीवन में परिवर्तनकारी साबित होगी। दोनों फेज में ये-ये बनेगा कुलपति प्रो. सुरेश ने बताया कि पहले पैकेज में मुख्य प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक भवन, पुस्तकालय, अनुसंधान प्रयोगशालाएं व अन्य विभाग बन रहे है। जबकि दूसरे पैकेज में कुलपति निवास, कर्मचारी निवास, अंतरराष्ट्रीय छात्रावास, लड़के ओर लड़कियों के लिए छात्रावास, किसान प्रशिक्षण छात्रावास, महिला एव पुरुषों के लिए, बहुउदेश्यीय हॉल, व्यायामशाला, एम्फीथिएटर, शॉपिंग कॉप्लेक्स, चिकित्सा देखभाल केंद्र, सीवरेज ट्रीटमेंट सिस्टम, सड़के, बैंक और एटीएम, डाकघर आदि का निर्माण किया होगा। प्रो. सुरेश ने बताया कि सारे भवन ग्रहा-3 रेटिंग वाली ग्रीन श्रेणी की जल संरक्षण की तकनीक से लैस होंगे।

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