Home haryana आईआईएम रोहतक ने आयोजित किया मैनेजमेंट कॉन्क्लेव 2026: “सीमाओं से परे संस्कृति: इंसान-केंद्रित काम, ब्रांड रिश्ते और नेतृत्व नेटवर्क”

आईआईएम रोहतक ने आयोजित किया मैनेजमेंट कॉन्क्लेव 2026: “सीमाओं से परे संस्कृति: इंसान-केंद्रित काम, ब्रांड रिश्ते और नेतृत्व नेटवर्क”

by ND HINDUSTAN
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एनडी हिन्दुस्तान

रोहतक । भारतीय प्रबंध संस्थान रोहतक ने मैनेजमेंट कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन किया, जिसमें 300 से अधिक छात्र और शिक्षक शामिल हुए। इस कार्यक्रम का मुख्य भाषण पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. देवी शेट्टी, संस्थापक नारायणा हेल्थ ने दिया। उन्होंने बताया कि भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म, बीमा में नए तरीकों और बड़े स्तर पर सेवाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को कैसे बेहतर बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक आधारित और सस्ते स्वास्थ्य मॉडल न केवल अधिक लोगों तक इलाज पहुँचा रहे हैं, बल्कि भारत को दुनिया में समावेशी हेल्थकेयर का एक मजबूत लीडर भी बना रहे हैं।

इस कॉन्क्लेव में कई बड़ी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें पेप्सिको, नेस्ले, आईटीसी इन्फोटेक, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी, एसबीआईकैप सिक्योरिटीज लिमिटेड, अशोक लेलैंड, नारायणा हेल्थ, डेल्हीवरी, लेग्रैंड और डॉ रेड्डीज़ लेबोरेट्रीज़ प्रमुख रहीं। सभी सदस्यों ने लीडरशिप, मार्केटिंग, रणनीति, फाइनेंस और मानव संसाधन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए, जिससे छात्रों को तेजी से बदलती कारोबारी दुनिया को समझने में मदद मिली।

आईआईएम रोहतक के अकादमिक मामलों के प्रो. कौस्तब घोष,डीन शैक्षणिक ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सभी सदस्यों का स्वागत किया और छात्र समितियों के प्रयासों की सराहना की। “सीमाओं के बिना संस्कृति” पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि वैश्वीकरण, तेज़ तकनीकी बदलाव और बदलती आर्थिक परिस्थितियाँ नेतृत्व को पहले से अधिक जटिल और मूल्यों पर आधारित बना रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हाइब्रिड काम करने का तरीका और उपभोक्ताओं का कम होता ध्यान अब इस बात को बदल रहा है कि संगठन भरोसा, सहयोग, और मौजूदा बदलावों के दौर में नेटवर्क की स्थिरता और निरंतरता कैसे बनाते हैं।

उद्घाटन सत्र में एसबीआईकैप सिक्योरिटीज लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ ने जनरेशन Z की उम्मीदों और चुनौतियों पर बात की। उन्होंने आत्म-जागरूकता, भावनात्मक समझ, टीमवर्क और अपने उद्देश्य को पहचानने की जरूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने भारतीय प्रबंध संस्थान, रोहतक में बन रही अनुशासन और उत्कृष्टता की संस्कृति की भी सराहना की।वहीं एनटीपीसी ग्रीन और एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी के सीईओ ने नेतृत्व, नेटवर्किंग और टेक्नोलॉजी के साथ काम करने की अहमियत पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने छात्रों को लंबे समय की सोच रखने, अच्छे संबंध बनाने और सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने की सलाह दी।इसके बाद प्रो. प्रवीण रंजन श्रीवास्तव, डीन -अनुसंधान एवं कार्यकारी शिक्षा ने सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी बातों से छात्रों के सीखने के अनुभव को गहराई मिली। पहला पैनल “डिजिटल दुनिया में प्रेरक नेतृत्व: बदलाव लाने वाले नेटवर्क बनाना” विषय पर था। इसमें बताया गया कि नेतृत्व अब सख्त पदानुक्रम से हटकर सहयोग और सहभागिता पर आधारित हो रहा है। चर्चा में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि मजबूत संगठन संस्कृति के साथ तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुसार काम करने की क्षमता, टीमवर्क और नए विचारों को अपनाना जरूरी है। भरोसा, सहानुभूति और टीमों के बीच की दीवारें तोड़ना प्रभावी और सफल संगठन बनाने के लिए अहम माना गया। दूसरा पैनल “अटेंशन इकोनॉमी में ब्रांड लॉयल्टी को नया रूप देना” विषय पर था। इसमें चर्चा हुई कि ब्रांड्स को ग्राहकों का भरोसा उनकी जरूरतों के अनुसार प्रासंगिक रहने, पारदर्शिता बनाए रखने और डेटा का जिम्मेदारी से उपयोग करने के जरिए कमाना होगा। बातचीत में बताया गया कि समुदाय आधारित जुड़ाव, नैतिक डेटा साझा करना और बैंकिंग, फार्मा व बी2बी जैसे क्षेत्रों में व्यक्तिगत अनुभव देना अब ब्रांड लॉयल्टी को नया आकार दे रहा है। इससे ब्रांड केवल लेन-देन तक सीमित न रहकर लंबे समय के, मूल्य आधारित रिश्ते बना पा रहे हैं।तीसरा पैनल ‘वर्क विदाउट वॉल्स: एक मिश्रित दुनिया में लोग, प्रदर्शन और उद्देश्य को नया रूप देना’ विषय पर केंद्रित था। इसमें चर्चा की गई कि संगठन हाइब्रिड और अलग-अलग स्थानों से होने वाले काम को कैसे संभाल रहे हैं। वक्ताओं ने खुली बातचीत के ज़रिये भरोसा बनाने, ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने और विभागों के बीच की दीवारें तोड़ने की अहमियत बताई। साथ ही यह भी कहा गया कि अलग-अलग जगहों पर सहयोग और अच्छा प्रदर्शन बनाए रखने के लिए साझा उद्देश्य, मार्गदर्शन पर आधारित नेतृत्व और निष्पक्ष तरीकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

मैनेजमेंट कॉन्क्लेव 2026 ने भारतीय प्रबंधन संस्थान, रोहतक की सोच के नेतृत्व और उद्योग-शिक्षा संवाद के एक सक्रिय केंद्र के रूप में स्थिति को फिर से मजबूत किया। पैनलों में साझा की गई विभिन्न जानकारियों से यह स्पष्ट हुआ कि तेजी से बदलती दुनिया में सफलता लचीले नेतृत्व, उद्देश्य से चलने वाले ब्रांड, भविष्य के लिए तैयार लोगों की कार्य प्रणालियों और ऐसी संस्कृति पर निर्भर करती है जो लगातार सीखने और नए प्रयोग को बढ़ावा देती है। छात्र संगठनों की चुस्ती बढ़ाने, लोगों की भागीदारी को मजबूत करने और तेजी से जटिल होते कारोबारी माहौल में लंबे समय तक मजबूती बनाने के व्यावहारिक नजरियों के साथ इस कार्यक्रम से निकले।भारतीय प्रबंधन संस्थान रोहतक के निदेशक प्रोफेसर धीरज शर्मा ने इस विचारों के आदान-प्रदान को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए छात्रों, स्टाफ और फैकल्टी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि छात्रों के समग्र विकास के लिए शिक्षा और उद्योग के बीच जुड़ाव बहुत जरूरी है। वर्तमान में 2,500 से अधिक छात्रों के नामांकन के साथ, आईआईएम रोहतक एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और एएमबीए से मान्यता प्राप्त है। यह दुनिया के शीर्ष 2% प्रबंधन संस्थानों में शामिल है। देश का सबसे बड़ा आईआईएम होने के कारण, यहां अलग-अलग शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि से आए छात्र पढ़ते हैं, जो शिक्षा और नीति के क्षेत्र में इसकी बढ़ती पहचान को दिखाता है।

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