Home Kurukshetra News लीगल गेम्स से होता है विद्यार्थियों का बौद्धिक विकासः प्रो. अमित लूदरी

लीगल गेम्स से होता है विद्यार्थियों का बौद्धिक विकासः प्रो. अमित लूदरी

by ND HINDUSTAN
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विधि संस्थान में लॉ फेस्ट का दूसरा दिन उत्साह और रचनात्मकता से भरपूर

एनडी हिन्दुस्तान

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में विधि संस्थान में आयोजित विधि गाला (लॉ फेस्ट)के दूसरे दिन विद्यार्थियों के जोश, प्रतिभा और रचनात्मकता का अद्भुत संगम रहा। दिनभर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला और अभिव्यक्ति का शानदार प्रदर्शन किया।इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. अमित लूदरी ने कहा कि लीगल गेम्स विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास व सर्वांगीण विकास होता है। कार्यक्रम की शुरुआत लीगल गेम्स के साथ हुई जिसमें छात्रों ने भर-चढ कर भाग लिया और अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके बाद मोनो एक्टिंग प्रतियोगिता का आयोजन हुआ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने एकल अभिनय के माध्यम से विभिन्न सामाजिक और कानूनी मुद्दों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उनकी अभिव्यक्ति, संवाद अदायगी और भावनात्मक प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद एड मेड शो हुआ जिसमें छात्रों ने सामाजिक एवं कानूनी विषयों पर आधारित रचनात्मक विज्ञापनों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी। प्रतिभागियों ने अपने अभिनव विचारों और प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।दोपहर में आयोजित स्टैंडअप कॉमेडी कार्यक्रम ने माहौल को हल्का-फुल्का और आनंदमय बना दिया। प्रतिभागियों ने अपने हास्यपूर्ण अंदाज और समसामयिक विषयों पर कटाक्ष के माध्यम से दर्शकों को खूब हँसाया।

दिन का अंतिम और सबसे आकर्षक कार्यक्रम क्राइम सीन प्रतियोगिता रही, जिसमें प्रतिभागियों ने काल्पनिक अपराध घटनाओं का विश्लेषण कर अपनी जांच-पड़ताल और तार्किक क्षमता का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता ने छात्रों की कानूनी समझ और विश्लेषणात्मक सोच को उजागर किया। कार्यक्रम के अंत में निर्णायकों ने प्रतिभागियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समस्त कार्यक्रम का सफल संचालन संस्थान के शिक्षकों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के सहयोग से संभव हो पाया।लॉ फेस्ट का यह दिन विद्यार्थियों के लिए न केवल मनोरंजन का माध्यम रहा, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास और कानूनी ज्ञान को भी सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध हुआ। प्रतियोगिताओं में निर्णायक मंडल के रूप में डॉ. प्रोमिला, डॉ. दीप्ति, डॉ. प्रियंका, डॉ. आरुषि, निर्मल, कमलकांत अग्रवाल मौजूद रहे। बालकिशन ने विधि संस्थान में हो रही सभी प्रतियोगिताओं का अवलोकन किया।

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