एनडी हिन्दुस्तान
यमुनानगर। डीएवी गर्ल्स कॉलेज के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के तत्वावधान में कॉलेज की 26 छात्राओं और छह स्टाफ सदस्यों ने पंचकूला के थापली में आयोजित तीन दिवसीय ( 27 से 29 अप्रैल तक ) नेचर कैंप में भाग लिया। शिविर में छात्राओं ने वन अन्वेषण, नवाचार और इको-टूरिज्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कैंप का आयोजन कॉलेज की कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. सुरिंद्र कौर और आईआईसी कन्वीनर विवेक के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में ममता थापर, विकास वालिया और नैना को-ओडिनेटर रहीं।शिविर के दौरान पिंजौर के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर विशाल कौशिक ने छात्राओं को पर्यटन क्षेत्र में करियर की संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि सरकार शिवालिक क्षेत्र को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित कर रही है और इको-टूरिज्म नीति के तहत इसे आय के प्रमुख स्रोत के रूप में उभारा जा रहा है।उन्होंने छात्राओं को क्षेत्र में पाई जाने वाली औषधीय वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आंवला, हरड़, अदरक, टमाटर और मशरूम जैसी फसलों की खेती, उनके प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। इससे विद्यार्थियों को ग्रामीण उद्यमिता के नए अवसरों की समझ विकसित हुई।शिविर में स्टार्टअप और उद्यमिता को लेकर भी मार्गदर्शन दिया गया। वक्ताओं ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने उत्पादों का ब्रांड तैयार कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं और ऊंचाइयों को हासिल कर सकती हैं।डॉ. सुरिंद्र कौर ने कहा कि इस नेचर कैंप का उद्देश्य छात्राओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। इससे उन्हें इको-टूरिज्म के विकास और स्थानीय उत्पादों को व्यवसायिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।सीएम ग्रीवेंस सेल के को-ऑर्डिनेटर नरेंद्र सिंह ने ट्रैकिंग गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के शिविर छात्राओं को प्राकृतिक पर्यावरण को करीब से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। विभिन्न सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह सीखा कि वे स्थानीय संसाधनों के साथ जुड़कर नवाचार और स्टार्टअप के नए आयाम कैसे विकसित कर सकती हैं। इस दौरान उन्होंने क्लाइमेंट चेंज लर्निंग लैब का भी दौरा किया। शिविर के सफल आयोजन में जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट अनिल नंदा ने सहयोग दिया।