हिन्दी भाषा श्रीलंका एवं भारत की सांस्कृतिक सेतु की परिचायक: प्रो. महासिंह पूनिया
केयू जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा श्रीलंका में हिन्दी एवं पत्रकारिता के विकास विषय पर व्याख्यान आयोजित
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के कुशल मार्गदर्शन में केयू जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में इंटरनेशनल लैक्चर एंड इंटरेक्शन ‘द स्कोप ऑफ हिंदी लैंग्वेज एंड जर्नलिज्म इन श्रीलंका’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में यूनिवर्सिटी ऑफ केलनिया, श्रीलंका से विज्ञान संकाय की प्रो. सुभाषिणी रत्नायके ने बतौर मुख्यातिथि कहा कि श्रीलंका में फिल्मी गीतों के माध्यम से हिन्दी भाषा सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में हिन्दी भाषा का अध्ययन भी कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा और संस्थान के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया और उनकी समस्त टीम का आभार प्रकट किया।प्रो. सुभाषिणी रत्नायके ने कहा कि श्रीलंका सदैव से ही भारत को बड़ा भाई मानता रहा है और उनसे सदैव सीखता रहा है और इसी कडी में ‘द स्काॅप आॅफ हिंदी लैग्वेज एंड जर्नल्जिम इन श्रीलंका’ के माध्यम से पुनः एक-दूसरे से व्यापक संवाद का सुअवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार 1950 से ही आरंभ हो गया था जिसका परिणाम यह है कि श्रीलंका के कुल 70 विश्वविद्यालयों में से 12 विश्वविद्यालयों में हिंदी के साथ 1500 स्कूलों में से 500 में पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ केलनिया सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में हिंदी जर्नलिज्म में मीडिया के क्षेत्र में अधिक कैसे पहुँच स्थापित हो इसी दिशा में केयू जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में विदेशी पर्यटकों की सुविधाओं के तीन मुख्य भाषाएं सम्मिलित है जिनमें सिंहली, अंग्रेजी और हिंदी, इसलिए हिंदी भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ वर्तमान में मीडिया पाठ्यक्रम की संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा है। प्रो. सुभाषिणी रत्नायके ने संस्थान के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया सहित सभी शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि वे एक शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल के साथ श्रीलंका अवश्य ही भ्रमण करे।इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि भारत, श्रीलंका, भूटान, म्यांमार का सांस्कृतिक, कला, साहित्य एक जैसा है इसी कड़ी में इंटरनेशनल लेक्चर एंड इंटरेक्शन ‘द स्कोप ऑफ हिंदी लैंग्वेज एंड जर्नलिज्म इन श्रीलंका’ का आयोजन विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए रखा गया है जिससे समस्त कोर्सो के विद्यार्थी लाभांवित हो सके। प्रोफेसर पूनिया ने कहा कि प्रोफेसर सुभाषिणी रत्नायके पिछले दो दशकों से हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रही है जोकि भारत की मातृभाषा और भारतीयों के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस विशेष इंटरनेशनल लैक्चर एंड इंट्रक्शन का मुख्य उदेश्य यही है कि संस्थान के विद्यार्थी भारत के बाहर हिंदी की महत्वपूर्णता को समझे और आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि इस इंटरनेशनल सांस्कृतिक जनसंपर्क को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान का एक शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल भविष्य में श्रीलंका जा सकता है वही श्रीलंका का डेलीगेशन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का भ्रमण कर सकता है इसे दोनों देशों के विद्यार्थियों के रिश्तों में प्रगाढ़ता आयेगी और वे भविष्य में प्रत्येक क्षेत्रों में कार्य कर सकेगे। व्याख्यान के दौरान प्रो. सुभाषिणी रत्नायके ने शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न विषयों के प्रश्नों के उत्तर दिए।इस अवसर पर संस्थान के सहायक प्रो. डाॅ. आबिद अली ने मंच का संचालन करते हुए मुख्यातिथि का परिचय करवाते हुए व्याख्यान कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।कार्यक्रम के सभी का धन्यवाद करते हुए संस्थान की सहायक प्रोफेसर डाॅ. मधुदीप ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान के माध्यम से संस्थान के विद्यार्थी सांस्कृतिक, भाषा एवं पत्रकारिता की दृष्टि से लाभान्वित हुए है। इस अवसर पर संस्थान के शिक्षक डाॅ. अभिनव, डाॅ. रोशनलाल, डाॅ. तपेश किरण, अमित जांगड़ा, सचिन वर्मा, गौरव कुमार, रितु, सुनिता, मोनिका दुआ, प्रीति एवं शोद्यार्थी रोहित, रविना, सुनिल कुमार, सचिन कुमार और विद्यार्थी उपस्थित रहे।