Home Kurukshetra News अनुभव, अकादमिक विजन और सांस्कृतिक धरोहर के संवाहक को मिली जींद विश्वविद्यालय की कमान

अनुभव, अकादमिक विजन और सांस्कृतिक धरोहर के संवाहक को मिली जींद विश्वविद्यालय की कमान

by ND HINDUSTAN
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चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए प्रो. राम पाल सैनी

एनडी हिन्दुस्तान

करनाल । हरियाणा के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक हलकों में एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत डीएवी पीजी कालेज करनाल के प्राचार्य प्रो. (डा.) राम पाल सैनी को जींद स्थित चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय का नियमित कुलपति (वाइस चांसलर) नियुक्त किया गया है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति के आदेशानुसार मंगलवार को उनकी इस पद पर विधिवत नियुक्ति की घोषणा की गई। उल्लेखनीय है कि प्रो. सैनी इससे पूर्व इस विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलपति के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके प्रशासनिक कौशल और अकादमिक प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें अब पूर्णकालिक दायित्व सौंपा गया है।तीन दशकों का सुदीर्घ शैक्षणिक एवं प्रशासनिक सफ़रप्रो. राम पाल सैनी का शैक्षणिक सफर लगभग 30 वर्षों का है। वर्ष 1996 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विधि विभाग (डिपार्टमेंट आफ ला) से अध्यापन की शुरुआत करने वाले प्रो. सैनी ने इसके बाद सनातन धर्म (एसडी) कालेज पानीपत में दो दशकों तक अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने डीएवी पीजी कालेज करनाल में बतौर प्राचार्य लगभग 10 वर्षों तक संस्थान का कुशल नेतृत्व किया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष रहने के साथ-साथ वे विश्वविद्यालय की सीनेट (कोर्ट), अकादमिक परिषद, खेल परिषद और विभिन्न अध्ययन मंडलों के सक्रिय सदस्य रहे हैं। इसके अतिरिक्त देश के पांच से अधिक बड़े विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण समितियों में उन्होंने विषय विशेषज्ञ के रूप में योगदान दिया है।भविष्योन्मुखी विजन: पीएचडी शोध और सटीक राजनीतिक विश्लेषणप्रो. सैनी केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि राजनीति विज्ञान के प्रकांड विद्वान भी हैं। वर्ष 2008-09 के दौरान उनके द्वारा किए गए शोध (पीएचडी) का विषय भारतीय जनता पार्टी के विशेष संदर्भ में पंथनिरपेक्षता के सकारात्मक एवं नकारात्मक आयाम’ था। समकालीन विश्लेषकों का मानना है कि लगभग दो दशक पूर्व प्रो. सैनी ने शोध के माध्यम से देश की जिस राजनीतिक करवट और भविष्य की रग’ को पहचाना था, आज राष्ट्रीय राजनीति का घटनाक्रम हुबहू उसी दिशा में अग्रसर दिख रहा है। उनका यह शोध उनके दूरदर्शी अकादमिक विज़न को प्रमाणित करता है।वैश्विक पटल पर अनुसंधान और एनईपी-2020 का सफल क्रियान्वयनअन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रो. सैनी ने पुर्तगाल और जापान जैसे देशों का दौरा किया है, जहां उन्होंने विभिन्न वैश्विक विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर उच्च स्तरीय अनुसंधान और अकादमिक साझीदारी स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद द्वारा उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में भी वे हरियाणा उच्चतर शिक्षा परिषद के मनोनीत सदस्य (कार्यकाल फरवरी 2026 से फरवरी 2029) हैं।लेखन, लोक संस्कृति और नागरिक सम्मानउच्च शिक्षा के साथ-साथ लोक संस्कृति के संरक्षण में प्रो. सैनी का योगदान अतुलनीय है। वे हरियाणवी संस्कृति के संवाहक, लेखक और गायक के रूप में पहचान रखते हैं। अब तक उनकी 7 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 45 से अधिक शोध-पत्र दर्ज हैं। देश-विदेश के 70 से अधिक संगोष्ठियों में वे मुख्य वक्ता रहे हैं। उनकी इन्हीं उपलब्धियों के लिए उन्हें डा. एपीजे अब्दुल कलाम एजुकेशन एंड एक्सीलेंस अवार्ड, भारत विद्या रत्न अवार्ड, दादा लख्मीचंद हरियाणवी संस्कृति अवार्ड और भारत सरकार के लोक संस्कृति मंत्रालय द्वारा इंडियन फोक कल्चर अवार्ड से विभूषित किया जा चुका है। उनकी इस नियुक्ति पर क्षेत्र के शिक्षाविदों, समाजसेवियों और छात्र संगठनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद शोध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए आयाम स्थापित करेगा।

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