Home Kurukshetra News शरीर की चिकित्सा करना पर्याप्त नहीं, मन, विचार और आचरण का स्वस्थ होना भी जरूरी: प्रो. धीमान

शरीर की चिकित्सा करना पर्याप्त नहीं, मन, विचार और आचरण का स्वस्थ होना भी जरूरी: प्रो. धीमान

by ND HINDUSTAN
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श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में एक दिवस योग संगोष्ठी आयोजित

एनडी हिन्दुस्तान

कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुर्वेद केवल शारीरिक रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि महर्षि चरक ने सभी रोगों के मूल में अनियंत्रित इच्छाओं को कारण माना है। शारीरिक चिकित्सा के साथ मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य भी उतना ही आवश्यक है। वे शुक्रवार को विश्वविद्यालय के ओल्ड लाइब्रेरी हॉल में आयोजित आयुष विश्वविद्यालय के योग विभाग एवं आयुष विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित योग संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे।कुलपति प्रो. धीमान ने कहा कि मानसिक चिकित्सा के बाद आध्यात्मिक चिकित्सा का महत्व आता है। जब व्यक्ति अध्यात्म की ओर अग्रसर होता है तो उसकी मानसिक स्थिति मजबूत होती है और वह जीवन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाता है। योग मन और इंद्रियों को नियंत्रित करने का प्रभावी माध्यम है, जिससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।प्रो. धीमान ने कहा कि योगासन शरीर को सुदृढ़ और निरोग बनाने में सहायक हैं, लेकिन यदि व्यक्ति वास्तव में मानसिक रूप से स्वस्थ और संतुलित रहना चाहता है तो उसे योग के यम और नियम का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल शरीर की चिकित्सा करना पर्याप्त नहीं है। जब तक मन, विचार और आचरण को भी स्वस्थ नहीं बनाया जाएगा, तब तक चिकित्सा अधूरी रहेगी। आयुर्वेद और योग का उद्देश्य व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों आयामों में संतुलन स्थापित करना है।आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. प्रियंका ने कहा कि योग स्वस्थ जीवन शैली की आधारशिला है। नियमित योगाभ्यास से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि तनाव, चिंता और मानसिक विकारों को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. साक्षी बुटानी ने कहा कि योग और आयुर्वेद एक-दूसरे के पूरक हैं। योग को दैनिक जीवन में अपनाकर व्यक्ति रोगों से बचाव कर सकता है तथा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त कर सकता है। योग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शीलत सिंगला ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 की तैयारियां अंतिम चरण पर हैं।शिक्षक, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए योग प्रोटोकॉल अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास होगा। इस अवसर पर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मंजू शर्मा, प्रो. आशु कटारिया, डॉ. मनीषा खत्री, डॉ. आशीष नांदल, डॉ. सत्येंद्र कुमार, डॉ. मोहित शर्मा, डॉ. शंभू दयाल, सहायक कुलसचिव राम निवास सहित अन्य उपस्थित रहे।

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