17 जून की मुठभेड़ से 24 जून की महापंचायत तक बढ़ा विवाद
न्याय की मांग ने पकड़ा बड़ा स्वरूप
एनडी हिंदुस्तान/राजेश शांडिल्य
चंडीगढ़। जिला के शाहपुर थाना क्षेत्र में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला अब बिहार की राजनीति, प्रशासन और न्याय व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। पुलिस द्वारा मुठभेड़ में मारे गए भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। 23 जून को पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज होने के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है, जबकि 24 जून को भोजपुर के बिलौटी गांव में प्रस्तावित महापंचायत पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।भरत भूषण तिवारी भले ब्राह्मण समुदाय से था,लेकिन उसके समर्थन में हर जातिधर्म और वर्ग के लोग शासन प्रशासन के खिलाफ मुखर हुए हैं। धरने प्रदर्शन और नारेबाजी के अलावा मजदूर और अति पिछड़ा वर्ग के लोग भरत भूषण तिवारी को अपना मसीहा और देवता बता रहे हैं।बिहार की नई नवेली भाजपा सरकार के लिए इस घटनाक्रम में डैमेज कंट्रोल करना कितना मुश्किल होगा,इसका अंदाजा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ दिख रहे वातावरण से प्रतीत हो रहा है। बिहार के दिग्गज भाजपा नेता अश्विनी चौबे सरीखे अन्य कई बड़े चेहरे खुल कर भरत भूषण तिवारी के साथ हुए अन्याय के विरुद्ध और उसके परिवार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।पिछले दिनों में खुद मुख्यमंत्री,पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माझी सहित अन्य कई नेताओं के बयानों के अलावा पुलिस के अनाप शनाप बयान आग में घी डालने का काम कर चुके हैं। घटनाक्रम 17 जून 2026 शाहपुर क्षेत्र में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच कथित मुठभेड़ हुई। पुलिस ने दावा किया कि गिरफ्तारी के दौरान तिवारी ने फायरिंग की, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई।18 से 20 जून परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट वायरल हुए, जिनमें एनकाउंटर को संदिग्ध बताया गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग शुरू कर दी।20 जून बढ़ते दबाव के बीच बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए। संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू हुई और कुछ कर्मियों पर प्रारंभिक कार्रवाई की गई।21 से 22 जून मामला सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट तक पहुंच गया। कई याचिकाओं में स्वतंत्र जांच, FIR और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई। इसी दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी घटना में संभावित चूक की बात स्वीकार की।23 जून मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब भरत भूषण तिवारी की मां की शिकायत पर SDPO, SHO समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई। इससे पहले तक जांच की मांग कर रहे लोगों को एक बड़ी कानूनी सफलता मिली और मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर लीं।24 जून भोजपुर के बिलौटी गांव में महापंचायत बुलाई गई है। आयोजकों का दावा है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होंगे। महापंचायत में न्यायिक जांच की प्रगति, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए जा सकते हैं।महापंचायत पर टिकी निगाहेंभरत भूषण तिवारी प्रकरण अब केवल एक पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस जवाबदेही, न्यायिक प्रक्रिया और जनविश्वास की परीक्षा बन चुका है। 23 जून को दर्ज हुई FIR ने संघर्ष कर रहे परिवार और समर्थकों को नई ताकत दी है। वहीं 24 जून की महापंचायत यह तय कर सकती है कि यह आंदोलन स्थानीय सीमाओं में रहेगा या बिहार स्तर के बड़े जनआंदोलन का रूप लेगा।फिलहाल पूरा प्रदेश इस बात का इंतजार कर रहा है कि जांच एजेंसियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं और महापंचायत से कौन-सा नया संदेश निकलकर सामने आता है।