एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र । गीता निकेतन आवासीय विद्यालय में सी.बी.एस.ई .के कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम के अंतर्गत “साइबर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी” विषय पर आचार्यों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।इस अवसर पर डॉ. संजय त्यागी को स्मृति चिन्ह भेंट कर विद्यालय परिवार द्वारा स्वागत किया गया।कार्यशाला का उद्देश्य आचार्यों को डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना तथा विद्यालयों में सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल वातावरण के निर्माण हेतु आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना था।कार्यक्रम के प्रथम चरण में डॉ. संजय त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक आचार्य और विद्यार्थी की दैनिक आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने सरल और वास्तविक उदाहरणों के द्वारा सुरक्षित पासवर्ड, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार उपयोग, डेटा गोपनीयता, फ़िशिंग, साइबर धोखाधड़ी तथा डिजिटल फुटप्रिंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि आपके साथ किसी भी प्रकार का साइबर अपराध होता है तो राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचित करना चाहिए | उन्होंने आचार्यों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को इंटरनेट का सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक उपयोग करने के लिए निरंतर प्रेरित करें।कार्यक्रम के द्वितीय चरण में जसप्रीत कौर ने अपने सत्र में साइबर बुलिंग, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA), तथा ऑनलाइन खतरों की पहचान और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनेक गतिविधियों के माध्यम से बताया कि थोड़ी-सी सतर्कता अपनाकर अधिकांश साइबर अपराधों से बचा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब आचार्य स्वयं डिजिटल रूप से जागरूक होंगे, तभी वे विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल नागरिक बनने के लिए प्रभावी मार्गदर्शन दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस साइबर अपराध से बचने के लिए “रुको -सोचो-एक्शन लो” का व्यवहारिक प्रयोग करना चाहिए।कार्यशाला के दौरान आचार्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने अनुभव साझा किए तथा साइबर सुरक्षा से संबंधित अनेक प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए। कार्यशाला के अंत में विद्यालय के प्राचार्य नारायण सिंह ने CBSE के दोनों विषय विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रम आचार्यों के व्यावसायिक विकास के साथ-साथ विद्यालयों में सुरक्षित डिजिटल संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगे। कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ हुआ।