श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक पंडित बालकृष्ण सिखोले 17 दिन से थे एलएनजेपी में दाखिल, नहीं हारी हिम्मत
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। चक्रवर्ती मौहल्ला के 85 वर्षीय पंडित बाल कृष्ण सिखोले अपनी जिंदादिली से कोरोना की जंग को जीतकर अपने परिवार के बीच पहुंच गए है। इस बुजुर्ग व्यक्ति ने एलएनजेपी अस्पताल में आक्सीजन बैड रहकर भी अपनी हिम्मत नहीं हारी और कोरोना वायरस को भी सहजता से हराने में कामयाबी भी हासिल की है। इस बुजुर्ग व्यक्ति ने अपने परिवार के भी किसी सदस्य को कोरोना नहीं होने दिया, जैसे ही कोरोना संक्रमण होने के संकेत मिले तो इन्होंने खुद को आईसालेट कर अपना चैकअप करवाया और पाजिटिव होने पर अस्पताल में दाखिल हो गए।
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्घार सभा के पूर्व प्रधान एवं सरंक्षक पंडित बाल कृष्ण सिखोले को 12 मई को कोरोना का संक्रमण होने पर एलएनजेपी अस्पताल में दाखिल होना पड़ा। पंडित बाल कृष्ण सिखोले को 10 साल पहले ह्दय में दो स्टंट भी डले थे और कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज भी लगवा ली थी। ऐसे में एलएनजेपी अस्पताल में 85 वर्षीय इस बुजुर्ग की चिकित्सकों, नर्सों और कर्मचारियों ने अच्छी तरह से देखभाल की और स्थिति को देखते हुए आक्सीजन भी लगानी पड़ी। इस दिलेर व्यक्ति ने आक्सीजन बैड पर रहकर ही अपनी हिम्मत और हौंसला कम नहीं किया अपितू 17 दिन एलएनजेपी में रहकर कोरोना को हराने में कामयाबी हासिल की है।
पंडित बाल कृष्ण सिखोले को 28 मई को सुबह छुट्टी मिलने पर फिर से अपने परिवार के सदस्यों का प्यार मिला और बच्चों ने अपने परिवार के मुखिया को अपने बीच पाकर अपनी खुशी का इजहार भी किया। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ-साथ नगर वासियों को कोरोना के संक्रमण से बचने का संदेश देते हुए कहा कि कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए सबसे पहले खुद को आईसोलेट करना चाहिए और फिर चिकित्सक की राय लेनी चाहिए। इतना ही नहीं इस वायरस के आने के बाद बिना घबराए सावधानियां बरत कर जीत हासिल करने की तरफ आगे बढऩा चाहिए। इस वायरस को मात देने के लिए अपने दिल, दिमाग और अपने इरादों को मजबुती देनी चाहिए।