Home haryana भगवान आस्था, विश्वास एवं समर्पण का नाम है : पं. विजय शंकर मेहता

भगवान आस्था, विश्वास एवं समर्पण का नाम है : पं. विजय शंकर मेहता

by ND HINDUSTAN
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अग्र भागवत कथा का दूसरा दिन 

मनुष्य जीवन में पांच मार्गों से समस्याएं आती है, शिकायत चित से जीवन में विराम चाहिए : प. विजय शंकर मेहता 

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। संत महापुरुषों की मौजूदगी में कुरुक्षेत्र में पहली बार अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन कुरुक्षेत्र द्वारा आयोजित श्री अग्र भागवत कथा में श्रद्धालु बड़े उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं। महाराजा अग्रसेन के जीवन के घटनाक्रमों का कथा में श्रद्धालु श्रवण कर रहे हैं। कथा के दूसरे दिन बाबा गुरविंदर सिंह, स्वामी ज्ञानेश्वर महाराज, महंत महेश मुनि एवं मेजर सिंह सहित अन्य संतों ने व्यासपीठ पर पूजन कर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर एस.पी. जेल करनाल अमित भादु, जी.एम. हरियाणा रोडवेज कैथल अजय गर्ग, डा. हिमांशु जैन इत्यादि दीप प्रज्वलित किया। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन एवं सहयोगी संस्थाओं की तरफ से खरैती लाल सिंगला, महेंद्र सिंगला, अजय गोयल, डा. अनूप सिंगला, राम कुमार गोयल, भूषण पाल मंगला, राम निवास बंसल, अजय गोयल बबलू, मंगत राम जिंदल, आशु गर्ग,  विकास गर्ग सी.ए., सुरेश गर्ग, सुशील कंसल, सतीश कंसल इत्यादि ने आए हुए अतिथियों का स्वागत तथा सम्मान किया। व्यासपीठ से विख्यात कथावाचक प. विजय शंकर मेहता ने श्री अग्र भागवत कथा को महाराजा अग्रसेन के माध्यम से आम आदमी के जीवन से जुडी कथा बताया।

उन्होंने कहाकि भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण के बिना भारतीय संस्कृति की कोई कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण भारतीय संस्कृति के दो आयाम हैं। अग्रवाल समाज भगवान श्री राम के वंशज हैं। प. विजय शंकर मेहता ने महाराजा अग्रसेन के जीवन प्रसंग की चर्चा करते हुए कहाकि जब मनुष्य जीवन में युद्ध अपनों से करना पड़े तो संघर्ष बढ़ जाता है। मनुष्य जीवन को पांच स्थितियों से गुजरना पड़ता है तथा मनुष्य जीवन में समस्याएं पांच मार्गों से ही आती हैं। उन्होंने अंतर्मन की चुप्पी रूपी मौन के महत्व बारे बताया। प्रत्येक मनुष्य में कोई न कोई बुराई है। इसे जानने की आवश्यकता है। संगीतमयी अग्र भागवत का रसास्वाद कर श्रद्धालु कई बार झूमने को मजबूर हुए।

प. विजय शंकर मेहता जी ने ज्ञान वर्षा करते हुए बताया कि शिकायत चित्त को विराम देकर स्वयं में ललक जगाकर, मौन साधते हुए एक जीवन संकल्प लें तो आपका जीवन अवश्य सफल होगा। महाभारत का युद्ध समाप्त होने पर भगवान श्री कृष्ण ने महाराज अग्रसेन जी की अविचल युद्ध करने के लिए बहुत प्रशंसा की। जिस वीर पुरुष के मन में युद्ध क्षेत्र में जाने के बाद भी करुणा शेष रहे तो वो अग्रसेन हैं। इस मौके पर महेन्द्र सिंगला, खरैती लाल सिंगला, अनूप सिंगला, अजय गोयल, रामनिवास बंसल, सत्य नारायण सिंगला, मित्रसेन गुप्ता, मनीष मित्तल, राजेश सिंगला, सुशील कंसल, राजीव गर्ग, राज कुमार मित्तल, जंग बहादुर सिंगला, कपिल मित्तल, सौरभ चौधरी, संजय गोयल, संतोष गुप्ता, भावना गुप्ता, कमलेश बंसल, स्वीटी गुप्ता, शोभा बसंल, उर्मिल सिंगला, उर्मिल अग्रवाल, शशि बाला गर्ग, शशि गोयल, सुषमा मंगला, मीना गुप्ता, शिल्पी गुप्ता, सुमीता मंगला, पुष्पा गर्ग इत्यादि मौजूद थे।

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