Home haryana अव्यवहारिक रेशनलाइजेशन के विरोध में हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ का सभी खंड कार्यालयों पर प्रदर्शन

अव्यवहारिक रेशनलाइजेशन के विरोध में हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ का सभी खंड कार्यालयों पर प्रदर्शन

by ND HINDUSTAN
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न्यूज डेक्स संवाददाता

जींद।सकसं हरियाणा से संबंधित हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ द्वारा जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों पर जेबीटी शिक्षकों की अव्यवहारिक रेशनलाइजेशन के विरोध में प्रदर्शन किए गए।हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान साधुराम व सचिव मामराज जांगड़ा ने कहा कि शिक्षा विभाग प्राथमिक शिक्षकों की रेशनलाइजेशन करने जा रहा है, लेकिन इसके पीछे उद्देश्य पदों को समाप्त करना है ना कि बच्चों को अध्यापक उपलब्ध कराना।वर्ष 2019 में अध्यापक छात्र अनुपात 1: 25 था जो 2020 में 1: 30 कर दिया गया और अब इस वर्ष जारी निर्देशों के अनुसार जिन विद्यालयों में 150 से अधिक बच्चे हैं, वहां अध्यापक छात्र अनुपात 1: 40 कर दिया गया है, जो कि साफ दर्शाता है कि इस नीति का उद्देश्य बच्चों को अध्यापक उपलब्ध कराना न होकर पदों को समाप्त करना ही है। वर्ष 2019 में 10+1 टीचर्स के लिए 251 बच्चों की जरूरत थी, जो इस वर्ष बढ़कर 361 बच्चे कर दी गई है। इस नीति से प्रदेश में हजारों की संख्या में प्राथमिक शिक्षकों के पद समाप्त हो जाएंगे और साथ ही अतिथि अध्यापक भी जिलों से बाहर दूर-दराज में पटक दिए जाएंगे ।

राज्य कोषाध्यक्ष संजीव सिंगला ने कहा की सरकार प्राथमिक शिक्षा को निजी हाथों में सौंपने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से कक्षा पहली व दूसरी को आंगनबाड़ियों को दिया जा रहा है और यही नहीं जिन आंगनबाड़ियों में ये कक्षाएं दी जा रही हैं उन आंगनबाड़ियों को भी एनजीओ के हवाले किया जा रहा है। इस प्रकार से पूर्व प्राथमिक शिक्षा और प्राथमिक शिक्षा पूरी तरह से सरकार के चहेते एनजीओ के हवाले हो जाएगी। इसीलिए ही पिछले लगभग 10 वर्षों से हजारों टीचर्स के रिटायर होने और लाखों बच्चे सरकारी स्कूलों में बढ़ने के बावजूद भी प्राथमिक शिक्षकों की कोई भर्ती नहीं की गई है।जिला कोषाध्यक्ष भूप सिंह वर्मा व प्रैस सचिव सत्येंद्र कुमार ने कहा कि हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ मांग करता है कि सभी विद्यालयों में मुख्य शिक्षक का पद स्वीकृत किया जाए और हर कक्षा को कम से कम एक अध्यापक जरुर दिया जाए। पूर्व प्राथमिक शिक्षा को प्राथमिक विद्यालयों से जोड़ा जाए।

पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के लिए अध्यापक – छात्र अनुपात 1 : 10 और कक्षा 1 से 5 के लिए 1: 20 हो,  शिक्षा पूरी तरह नि:शुल्क हो और कामन स्कूल सिस्टम के तहत अनिवार्य रूप से पड़ोस के सार्वजनिक स्कूल में हो। सभी कैटेगरी के अध्यापकों के लिए तबादला ड्राइव शीघ्र चलाया जाए। सभी प्रकार के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। अगर सरकार ने इस नीति में सुधार नहीं किया तो शीघ्र ही पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।राज्य ऑडिटर वेदपाल रिढ़ाल ने उपस्थित कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार तानाशाही पर उतारू है और जगह जगह किसानों पर अत्याचार कर रही है उनको गाड़ियों के नीचे कुचला जा रहा है ।इस अवसर पर भूप सिंह वर्मा,जितेंद्र जागलान, रमेश पांचाल, रामफल नागर, मोहनलाल, रमेश ढुल ,अभिमन्यु, वेदपाल रिढ़ाल , सुरेंदर कुमार, सतीश लोहान , चंद्रहास लोहान, सुरेंदर चहल, ईश्वर नगूरां, संजय, हरज्ञान सिंह, नरेन्द्र सिंह, शमशेर कौशिक, हैप्पी मोर, रामनिवास, सतीश कुमार, सतेंद्र गौतम, परमात्मा प्रसाद, रोहतास आसन, शमशेर बूरा, सतबीर गहलोत, ईश्वर सैणी, बलराज सिंह, सत्येंद्र कुमार, महेंद्र गौतम, सुनिता, महावीर पोपड़ा, सविता, निर्मला देवी आदि मौजूद रहे।

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