Home haryana क्रांतिकारी वीर सावरकर के बलिदान दिवस पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भारत रत्न देने की मांग की प्रधानमंत्री से

क्रांतिकारी वीर सावरकर के बलिदान दिवस पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भारत रत्न देने की मांग की प्रधानमंत्री से

by ND HINDUSTAN
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न्यूज डेक्स संवाददाता

रेवाड़ी। भारत के महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी,समाज सुधारक एवं राष्ट्रवादी विचारक वीर दामोदर सावरकर के बलिदान दिवस पर हिंदू हाई स्कूल के सेमिनार हॉल में  भारत माता की आरती,वंदे मातरम के उद्घोष और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा एवं हिंदू स्कूल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाजसेवी एमपी गोयल ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा वीर सावरकर का देश की आजादी में महान योगदान हमेशा अजर अमर रहेगा। सावरकर का देशभक्ति का संदेश युवाओं को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। वीर सावरकर मंच के संस्थापक श्री निवास शास्त्री ने कहा वीर सावरकर का देश की आजादी के लिए क्रांतिकारी आंदोलन युवा पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने का हिंदू राष्ट्रवाद की राजनीतिक विचारधारा को विकसित करने का बहुत बड़ा श्रेय सावरकर को ही जाता है। उन्होंने कहा सावरकर भारत में सिर्फ हिंदू धर्म चाहते थे उनका ऐसा मानना था कि भारत हिंदू प्रधान देश है। उन्होंने कहा वीर सावरकर का सपना था कि विश्व में भारत को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में पहचान मिलनी चाहिए| भारत की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्षों में वीर सावरकर का नाम बेहद महत्वपूर्ण रहा है। गिरीश भारद्वाज ने कहा वीर सावरकर का बलिदान हमेशा अजर अमर रहेगा।     

कार्यक्रम के संयोजक सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. आर.के. जांगड़ा विश्वकर्मा,सदस्य, स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा सरकार ने कहा महान देशभक्त और क्रांतिकारी सावरकर ने अपना संपूर्ण जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया। अपनी राष्ट्रवादी विचारों से जहां सावरकर देश को स्वतंत्र कराने के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे। सावरकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते थे। सावरकर ने हिंदुत्व शब्द को गढा और हिंदू धर्म की विशेषता पर जोर दिया जो सामाजिक और राजनीतिक साम्यवाद से जुड़ा था। उन्होंने भाषणों लिखो विकृतियों से सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और हिंदुत्व को मजबूत करने का कार्य निरंतर जारी रखा। सावरकर भारत के पहलें व्यक्ति थे 1906में स्वदेशी का नारा दें विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी।और कर भारत की पहली व्यक्ति थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के केंद्र लंदन में उसके विरुद्ध क्रांतिकारी आंदोलन संगठित किया था।”दी इंडियन वार ऑफ इंडिपेंडेंस-1857″सावरकर द्वारा लिखित पुस्तक ब्रिटिश शासन को हिला कर रख दिया था।विक्रांति की आकाशगंगा की प्रखर तुम नक्षत्रों में से एक थे जिन्होंने नवीन भारत को घटने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा सावरकर को अग्नि धर्मा हिंदुत्व की प्राण धारा के रूप में हमेशा याद किया जावेगा। ध्वज तिरंगे के बीच में धर्म चक्र लगाने का सुझाव सर्वप्रथम दिया था जिसे राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद नें माना विनायक दामोदर सावरकर दुनिया के अकेली स्वतंत्र योद्धा थे जिन्हें दो- दो आजीवन कारावास की सजा मिली। इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग भी की गई। प्राचार्य डॉ.आर.के.शर्मा ने कहा प्राचीन भारतीय संस्कृति को बनाए रखने और सामाजिक कल्याण की दिशा में काम करने के लिए रत्नागिरी में हिंदू महासभा की स्थापना वीर सावरकर द्वारा की गई थी। वीर सावरकर 1911 से 1921 तक अंडमान जेल में रहे और उन्होंने जेल की दीवारों पर 10 हजार लाइनों की कविताएं पत्थर और कोयले से लिखी। प्रवक्ता मंजू यादव द्वारा कुशल स्टेज संचालन किया गया। इस अवसर पर प्रतिभावान कनिष्का,ईशा, सीमा,ईशा, निष्का,नेहा,अंजलि अक्षय,भारत,सुमित,निशांत आदि छात्र छात्राओं को वीर सावरकर का चित्र साहित्य और तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया| इस अवसर पर मुरली श्याम, प्रदीप डीपीई,मंजू यादव, उषा यादव,शशि कांता, प्रमिला, नीता, रेनू यादव,सरोज, आरती,मंजू यादव,उषा,सतीश अभी अध्यापक गण के साथ साथ अनेक छात्र छात्राएं उपस्थित थी।

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