आयुर्वेदिक औषधियों में पंचगव्य का महत्व एवं उपादेयता विषय पर कार्यशाला का आयोजन
न्यूज़ डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र । श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग की ओर से बुधवार को आयुर्वेदिक औषधियों में पंचगव्य का महत्व एवं उपादेयता विषय पर दो दिवसीय प्रेक्टिकल कार्यशाला का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कार्यशाला का शुभारंभ रसेश्वर स्तुति के साथ किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि गाय से उत्पन्न हर एक चीज औषधि है। गाय का गोबर, मूत्र, दूध, दही और घी इन्हें पंचगव्य के रूप में जाना जाता है, जो व्यक्ति के शरीर के कई रोगों में निदान के लिए भी लाभकारी है। पंचगव्य में अद्भुत औषधीय गुण होते हैं अतः छात्रों को अवगत करवाया जाए की आयुर्वेदिक रस औषधियों के निर्माण में पंचगव्यों की क्या उपयोगिता है और पंचगव्य के प्रयोग से आयुर्वेदिक औषधियों में गुणों की वृद्धि होती है। इसलिए जरूरी है कि दुनिया पर के लोगों में पंचगव्य के बारे में जागरूकता पैदा की जाए। प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना ने कहा कि कार्यशाला में विद्यार्थियों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। गाय को जहां आज भी भारतीय संस्कृति में माता के रूप में पूजा जाता है वहीं गाय से प्राप्त होने वाले दूध, दही, घी, गोबर और मूत्र का भी औषधीय रूप में उतना ही महत्व है। रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. विदूषी त्यागी ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र नागपुर के विशेषज्ञ डॉ. नंदनी भोजराज, वैद्य अखिलेश गुप्ता, वैद्य सतविंद्र और महेश द्वारा विद्यार्थियों को पंचगव्य द्वारा बनाई आयुर्वेदिक औषधियों के मह्त्व बताया और प्रेक्टिकल करवाया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने भी बढ़चढ़ कर भाग लिया। कार्यशाला के आयोजन में डॉ. रविराज, डॉ. सुमन लता व पीजी स्कॉलर का पूरा योगदान रहा। इस अवसर पर आयुष विवि से सबंध दो कॉलेजों के प्राध्यापक भी मौजूद रहे।