फौगाट ने मुख्यमंत्री के नाम रेवाड़ी के उपायुक्त को दिया ज्ञापन
आजादी मिलने के 25 साल बाद भारत सरकार और 35 साल बाद हरियाणा सरकार ने माना था आजाद हिंद फौज के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी
1972 और 1981 में जो स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समितियां बनी,उन्होंने जिनकी सिफारिश की थी,सिर्फ उन्हें ही मिला सम्मान
आज तक नेताजी की सेना के अनगिनत पराक्रमी है सम्मान और अधिकार से वंचित
न्यूज डेक्स हरियाणा
रेवाड़ी,21 जनवरी। लंबे समय से आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवार के सम्मान और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे श्रीभगवान फौगाट ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को चार साल से दिये गये अनुरोध ज्ञापन मांगों पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई कराने पुनः ज्ञापन मांग पत्र सौंपा है। फौगाट द्वारा पिछले आठ साल में 200 से ज्यादा गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों रिकार्ड खोजा गया है। फौगाट के अनुसार यह रिकार्ड संबंधित जिलों के उपायुक्तों और राज्य सरकार के प्रोटोकोल ज्वाइंट सैक्रेटरी सहित स्वतंत्रता सम्मान समिति को भेजा गया है,लेकिन संबंधित परिवारों को इस रिकार्ड मिलने की खबर तक नहीं है। सरकार ने संबंधित परिवारों तक यह रिकार्ड पहुंचाया ही नहीं। परिवारों तक नहीं पता कि उनका रिकार्ड मिल चुका है। वे आज भी यही सोचते हैं कि उनके परिवार के सदस्य ब्रिटिश आर्मी में थे,जबकि उनका रिकार्ड आजाद हिंद फौज का बनना चाहिये था,क्योंकि उनके परिवार के सदस्य ब्रिटिश आर्मी छोड़ आजाद हिंद फौज का हिस्सा बन गये थे। फौगाट के मुताबिक ब्रिटिश आर्मी ने पूरा रिकार्ड नहीं दिया,१
फौगाट के मुताबिक 1942 से 1945 के बीच ब्रिटिश आर्मी के जिन भारतीय सैनिकों ने बगावत कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का साथ दिया था, वे अगस्त 1945 की घटना के बाद बिखर गये थे। इनमें से आजाद हिंद फौज के काफी संख्या में सैनिकों को ब्रिटिश आर्मी ने गिरफ्तार कर लिया था,जबकि इनमें से अनगिनत सैनिकों पर गंभीर आरोप लगाकर घर भेज दिया गया था।फौगाट का कहना है कि बाद में भारत की हाई अथारिटी ने जब नेताजी की सेना का रिकार्ड ब्रिटिश आर्मी से मांगा था,तब आधा अधूरा रिकार्ड ही दिया गया था। इसी वजह से इन सैनिकों को ना तो ब्रिटिश आर्मी की सुविधाओं का लाभ मिला और ना ही आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी का।
फौगाट ने बताया है कि आजादी के बाद भारत सरकार ने आजाद हिंद फौज के सैनिकों को स्वतंत्रता सेनानी मानने से इंकार कर दिया था,लेकिन आजादी मिलते के 25 साल बाद पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1972 में और हरियाणा सरकार ने 1981 में स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति बनाने की घोषणा की थी। इस समिति ने जिसकी सिफारिश की थी,उसे स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन मिल गई और जिन स्वतंत्रता सेनानियों का नाम रह गया उनमें से काफी संख्या में आजतक सम्मान और पेंशन दोनों से वंचित हैं। श्रीभगवान फौगाट ने बताया कि पिछले आठ वर्षों में उन्होंने इन्हीं में से हरियाणा के 200 से ज्यादा स्वतंत्रता सेनानियों का रिकार्ड खोज निकाला है और यह सारा रिकार्ड हरियाणा सरकार क के संबंधित विभाग,स्वतंत्रता सेनानी के संबंधित जिला उपायुक्त और स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति को सौंपा है।
फौगाट का कहना है कि जो रिकार्ड सरकार को उपलब्ध कराए गये हैं,वे तुरंत परिवारों तक पहुंचाया जाए और उन्हें सम्मान देने का काम किया जाए। उन्होंने कहा कि इनमें से जो स्वतंत्रता सेनानी जीवित हैं और जो नहीं हैं उनके परिवारों को राष्ट्रीय पर्वों पर सम्मान देना सरकार का कर्तव्य बनता है। केंद्र सरकार नेताजी के नाम पर कई घोषणाएं कर रही हैं,लेकिन जिन उनके वीर सैनिक आज भी उचित सम्मान से वंचित हैं। फौगाट ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया,जिन्होंने नेताजी की जयंती को हर साल पराक्रम दिवस में मनाने और उनके नाम पर ट्रेन चलाने जैसी अच्छी घोषणाएं की हैं। वहीं उन्होंने मांग की कि उन सैनिकों का भी सम्मान का ध्यान रखा जाए,जिनके पराक्रम को नेताजी ने भी माना था।