वीरों एवं महापुरुषों के बलिदान की देन है स्वतंत्रता दिवसः प्रो. सोमनाथ सचदेवा
कुवि में 79 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह पूरे जोश व उत्साह के साथ मनाया गया
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने 79 वें स्वतंत्रता दिवस पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में राष्ट्रीय ध्वजारोहण किया व एनसीसी परेड की सलामी लेकर शहीदों को नमन किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के संगीत एवं नृत्य विभाग, आईआईएचएस, यूनिवर्सिटी सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने स्वतंत्रता दिवस की बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को हमने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं पाई बल्कि अपने आत्मसम्मान और अपनी पहचान और अपने उज्जवल भविष्य को भी पुनः प्राप्त किया। आज जब हम अपने तिरंगे को आकाश में लहराता हुआ देखते हैं तो हमें याद आती है उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों की महात्मा गांधी से लेकर सुभाष चंद्र बोस तक, भगत सिंह से लेकर वीर सावरकर तक एवं बाबा भीम राव अंबेडकर जैसे महापुरुषों की जिन्होंने अपने त्याग और बलिदान से आजादी का यह दीप जलाया।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि हरियाणा की धरती में भी राव तुलाराम जैसे अनेक वीरों का जन्म दिया। आज का दिन हम उन वीर सैनिकों को भी याद करते हैं जो विषम से विषम परिस्थितियों की परवाह न करते हुए हमारी सीमाओं पर खड़े होकर हमारी रक्षा करते हैं ताकि हम अपने घरों में सुख चैन से रह सकें। हाल ही में संपन्न आपरेशन सिंदूर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस और अद्वितीय शौर्य का जीवंत उदाहरण है जहां उन्होंने दुर्गम परिस्थितियों में असाधारण पराक्रम और अनुशासन का परिचय देते हुए राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोपरि रखा। इस अभियान की सफलता हमारी सेना और हमारे शीर्षस्थ नेतृत्व के दृढ़ संकल्प, अटूट निष्ठा और मातृभूमि के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि आजादी के बाद 78 वर्षों में भारत ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने भी शिक्षा जगत में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कुवि हरियाणा का एकमात्र सरकारी विश्वविद्यालय है जिसे नैक द्वारा ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त है। एनआरआईएफ की रैंकिंग में सरकारी विश्वविद्यालयों में हमारा 41वां स्थान, यूजीसी की कैटेगरी वन सूची में आठवां स्थान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को इसके सभी प्रमुख प्रावधानों के साथ लागू करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय हमारा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय है। यह केवल आंकड़े नहीं बल्कि सभी के परिश्रम, दूरदृष्टि और उत्कृष्टता की सतत साधना का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षो में अनुसंधान और पेटेंट फाइलिंग क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुई है। हमारे पास 60 से अधिक पेटेंट है हमारे शोध पत्र देश विदेश के उच्च प्रभाव वाले जर्नल्स में प्रकाशित हो रहे हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र में कुवि को लगभग 11 करोड़ के 6 स्पोंसर रिसर्च प्रोजेक्ट मिले हैं जिसमें मेटेरियल साइंस का 10 करोड़ का प्रोजेक्ट भी शामिल है। इस सत्र में चार एप्रेंटिसशिप एम्बेडेड प्रोग्राम शुरू किए गए हैं और इनके साथ ही यूजी के प्रोग्राम्स में आनर्स प्रोग्राम भी शुरू किए गए हैं। पहले से चल रहे आनलाइन प्रोग्राम्स में 10 हजार से ज्यादा विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। खेल व सांस्कृतिक क्षेत्र में भी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हमेशा से अग्रणी रहा है। यह हमारे लिए बहुत ही गौरव की बात है।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों व गैर-शिक्षक कर्मचारियों को समय पर पदोन्नत किया जा रहा है। इसके साथ ही इन्हें उत्कृष्ट कार्यो के लिए अवार्ड देकर सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि देश के लिए सपनों को सच करने का समय आ गया है। 2047 की घड़ी हमें पुकार रही है। पुकार है भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की ।हम भारत के इस अमृत काल के सिपाही हैं। विकसित राष्ट्र बनने का यह स्वर्णिम अवसर है क्योंकि आज हम 4 ट्रिलियन जीडीपी के साथ विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और 2030 तक तीसरे स्थान तक पंहुचने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। 15 से 29 वर्ष के बीच के 37 करोड़ युवा भारत की बहुत बड़ी ताकत हैं। हम इन सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर, कौशल विकास कर, उद्यमिता व नवाचार की भावना विकसित करके इन्हें जाब सीकर से जाब प्रोवाइडर बना सकते हैं। एनईपी-2020 हमें इसके लिए प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी दिनचर्या में स्व का भाव विकसित करने के लिए हमारे विचार, हमारी व्यवस्था, वस्तुए व वृत्ति का स्वदेशीकरण आवश्यक है। अमेरिका द्वारा शुरू किए इस टेरिफ दौर में आत्मनिर्भरता और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना बहुत अहम हो गया है। इसके लिए हमें ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। हमारा मूल मंत्र इच्छा से देसी, जरूरत में स्वदेशी व केवल मजबूरी में ही विदेशी वस्तुओं का प्रयोग करना एवं धीरे-धीरे इस मजबूरी को कम करते जाना है। हमें यह समझना होगा की स्वदेशी हमारा आर्थिक सुरक्षा कवच है। है। मंच का संचालन युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने किया।
इस मौके पर कुलसचिव लेफ्टिनेंट डॉ. वीरेन्द्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. डीएस राणा, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, प्रो. जसबीर ढांडा, प्रो. प्रीति जैन, प्रो. जितेन्द्र शर्मा, प्रो नरेन्द्र सिंह, प्रो. उषा रानी, प्रो. नीलम ढांडा, प्रो. ओमवीर, प्रो. रीटा प्रो. कुसुम लता, प्रो. मनोज जोशी, मुख्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. आनंद कुमार, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, उपनिदेशक डॉ. जिम्मी शर्मा, डॉ. सलोनी दिवान, प्रो. परमेश कुमार, प्रो. महाबीर रंगा, प्रो. दीपक राय बब्बर, डॉ. जितेन्द्र खटकड़, डॉ. आरती श्योकन्द, प्राचार्य डॉ. सुखविन्द्र सिंह, कुंटिया प्रधान राजवंत कौर, महासचिव रविन्द्र तोमर सहित शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी मौजूद थे।