तीन दिवसीय घोष वर्ग का हुआ शुभारंभ
शताब्दी वर्ष की तैयारी को लेकर स्वयंसेवकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
एनडी हिन्दुस्तान
रोहतक। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय हरिनाद घोष वर्ग का शुभारंभ रोहतक के वैश्य कॉलेज में शुक्रवार को बड़े उत्साह और अनुशासनपूर्ण वातावरण में शुरु हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना एवं वंदना से हुई। तत्पश्चात स्वयंसेवकों ने संघ परंपरा के अनुरूप घोष वादन की विविध तालों और धुनों का सामूहिक प्रदर्शन किया। घोष वर्ग के माध्यम से स्वयंसेवकों ने भारतीय संगीत परंपरा, अनुशासन, तालमेल और सामूहिकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। घोष वर्ग में 400 स्वयंसेवकों ने प्रतिभागिता की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. सुरेंद्र पाल ने शिरकत की। घोष वर्ग में प्रांत प्रचार प्रमुख राजेश कुमार पालक व गुरुग्राम विभाग के सह विभाग कार्यवाह संजीव कुमार शिविर के कार्यवाह के तौर पर मौजूद रहे। स्वयंसेवकों ने वैश्य कॉलेज से लेकर गौशाला तक पथ संचलन भी किया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने पारंपरिक वाद्य-यंत्रों जैसे शंख, नगाड़ा, भेरी और तुरही पर मनोहारी प्रस्तुतियां दी। शहर में जगह-जगह स्वयंसवेकों का स्वागत भी किया गया। प्रांत शारीरिक शिक्षण प्रमुख अनिल कुमार, प्रांत सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख विक्रांत, प्रांत घोष शिक्षण प्रमुख सन्नी मिढ़ा, प्रांत सह घोष शिक्षण प्रमुख सचिन भी विशेष तौर पर मौजूद रहे।
प्रांत प्रचारक डॉ. सुरेंद्र पाल ने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि घोष वर्ग भारतीय संस्कृति के मूल्यों का प्रतीक है, जो राष्ट्रभावना को जागृत करता है और युवाओं में ऊर्जा, निष्ठा एवं संगठन की भावना उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि संघ अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है। विजयदसवीं से शताब्दी वर्ष की शुरुआत होगी और इस दौरान हर मंडल, और हर उपनगर व बस्ती में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस शताब्दी वर्ष पर मंडल स्तर तक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि संघ शताब्दी वर्ष को समाज के लोगों के साथ मिलकर पूरे हर्षोल्लास के साथ मना सके। वर्ग पालक राजेश कुमार व वर्ग कार्यवाह संजीव कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि घोष वर्ग को लेकर स्वयंसेवकों में खासा उत्साह है। आज इस विधा के प्रति स्वयंसेवकों का रुझान बढ़ रहा है। शुरुआती दौर में इस विधा के प्रति स्वयंसवेकों में काफी कम रुचि थी लेकिन आज एक घोष वर्ग में 400 की संख्या में स्वयंसेवकों के शामिल होने से इस बात का स्वयं ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस विधा की तरफ किस तरह से स्वयंसेवकों का रुझान बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। इस शताब्दी वर्ष में इस विधा को बढ़ाने के लिए भी हर संभव प्रयास किया जाएगा। इस तीन दिवसीय घोष वर्ग में स्वयंसेवकों को घोष का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ इनको बौद्धिक स्तर पर भी मजबूत किया जाएगा। घोष वर्ग का समापन 31 अगस्त को होगा।