Home Kurukshetra News  वामन पुराण की कथा का हुआ समापन

 वामन पुराण की कथा का हुआ समापन

by ND HINDUSTAN
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मुख्य यजमान के रूप में मैट्रो अस्पताल के एमडी अंकित शर्मा हुए शामिल, उपेंद्र सिंघल ने की मुख्यातिथि के रूप में शिरकत

वामन भगवान से जुडेÞ तीर्थों पर भी आयोजित होगा वामन द्वादशी पर्व : उपेंद्र सिंघल

भगवान विष्णु का मानव के रूप में पहला अवतार है वामन भगवान : शुकदेव आचार्य

एनडी हिन्दुस्तान

कुरुक्षेत्र। श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा द्वारा आयोजित वामन द्वादशी मेले के दूसरे दिन वामन पुराण की कथा का समापन हुआ। समापन अवसर पर  केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल मुख्यातिथि तथा मैट्रो अस्पताल के एमडी अंकित शर्मा ने मुख्य यजमान के रूप में भाग लिया। इससे पहले मानवतावादी विश्व संस्थान की साध्वी आशा मानव व मातृभूमि सेवा मिशन के संचालक डा. श्रीप्रकाश मिश्रा ने दीप प्रज्जवल्लित करके कथा का शुभारंभ किया। समापन सत्र में पहुंचने पर मेला आयोजन समिति के संयोजक जयनारायण शर्मा, श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के प्रधान यशेंद्र शर्मा ने सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया और वामन भगवान का चित्र भेंट किया। अतिथियों ने व्यास पीठ पर माल्यार्पण किया तथा आरती करके कथा का समापन हुआ। कार्यक्रम का मंच संचालन सभा के प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा ने किया।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने अपने संबोधन में कहा कि श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड तथा नगर की धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से 2021 में वामन द्वादशी मेले का पूर्नजागरण किया था। सभा का यह कदम बहुत सराहनीय है। उन्होने कहा कि कुरुक्षेत्र के 48 कोस की भूमि में अभिमन्युपुर(आदिति वन) वामन भगवान का जन्म हुआ। इस भूमि में पांच तीर्थ स्थल ऐसे हैं जो वामन भगवान से जुडेÞ हुए हैं। इन सभी पर वामन द्वादशी पर्व आयोजित करने की योजना कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड बना रहा है। सौंगल गांव भी वामन पुराण से जुड़ा हुआ है। वहां से भी श्रद्धालु कुरुक्षेत्र वामन द्वादशी मेले में पहुंचे हैं। उन्होने बताया कि वामन द्वादशी मेले के अवसर पर खेल विभाग के सौजन्य से क्रिडा प्रतियोगिता तथा शिक्षा विभाग के सौजन्य से श्लोकोचार्ण, रंगोली, पोस्टरमेकिंग व पेंटिंग प्रतियोगिताएं करवाई गई हैं। विजेता प्रतिभागियों को श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा की ओर से नकद राशि ईनाम स्वरूप दी गई है।
व्यास पीठ से बोलते हुए आचार्य शुकदेव ने कहा कि कुरुक्षेत्र की भूमि को यह गौरव प्राप्त है कि वामन भगवान का जन्म भी इसी भूमि में हुआ और इसी भूमि में वामन भगवान अंर्तद्यान हुए। उन्होने कहा कि देवताओं को उनका राज्य वापिस दिलाने के लिए भगवान विषणु ने महर्षि कश्यप व आदिति के घर वर्तमान में अभिमन्युपुर गांव में जन्म लिया। मानव के रूप में भगवान विष्णु का यह पहला अवतार है। राजा बलि ने सन्निहित सरोवर के किनारे ही यज्ञ किया था और उस यज्ञ के दौरान वामन भगवान अभिमन्युपुर से चलकर यहां आए और इसी भूमि पर राजा बलि से तीन कदम भूमि भिक्षा में मांगी। पहले कदम में उन्होने सारी पृथ्वी नाप दी और दूसरे कदम में सारा ब्रह्मांड नाप दिया और जब तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नही बची तो राजा बलि नतमस्तक हो गए और उनके मस्तिष्क पर वामन भगवान ने अपना चरण रखा और राजा बलि को मोक्ष प्राप्त हुआ।
 

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