Home Chandigarh हरियाणा की नौकरियों में हरियाणवी युवाओं के हक और हित को प्राथमिकता दी जाए– दीपेन्द्र हुड्डा

हरियाणा की नौकरियों में हरियाणवी युवाओं के हक और हित को प्राथमिकता दी जाए– दीपेन्द्र हुड्डा

by ND HINDUSTAN
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प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बताएं अगर हरियाणा की ज्यादातर सरकारी नौकरियों में भी बाहर के बच्चे लगेंगे तो हरियाणा के बच्चे कहाँ जायेंगे – दीपेन्द्र हुड्डा

हरियाणा 28 प्रदेशों में अकेला ऐसा प्रदेश है जहाँ HPSC चेयरमैन बाहर से लाकर बनाया गया – दीपेन्द्र हुड्डा

हरियाणा के युवाओं की काबिलियत पर सवाल उठाने वाले HPSC चेयरमैन को तुरंत बर्खास्त कर 3 करोड़ हरियाणावासियों में से किसी हरियाणवी को HPSC चेयरमैन नियुक्त किया जाए – दीपेन्द्र हुड्डा

एनडी हिन्दुस्तान

चंडीगढ़। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा की नौकरियों में हरियाणवी युवाओं के हक और हित को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष को अनर्गल बयानबाजी से बचना चाहिए ये उनको शोभा नहीं देता। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बताएं अगर HPSC के दायरे में आने वाली नौकरियां दूसरे प्रदेशों के युवाओं को मिलेगी तो हरियाणा के बच्चे कहाँ जाएंगे? दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हर राज्य की सरकारें स्थानीय लोगों को तरजीह देती है एवं अपने यहाँ की भर्ती प्रक्रिया और नियम इस तरह बनाती हैं जिससे प्रदेश की नौकरियां मुख्य रूप से स्थानीय युवाओं को ही मिलें। उन्होंने कहा कि हरियाणा 28 प्रदेशों में अकेला ऐसा प्रदेश है जहाँ HPSC चेयरमैन बाहर से लाकर बनाया गया। दूसरा ऐसा प्रदेश बताएं, जहां पब्लिक सर्विस कमीशन का चेयरमैन उस प्रदेश की बजाए किसी दूसरे प्रदेश का बनाया गया हो? दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के युवाओं की काबिलियत पर सवाल उठाने वाले HPSC चेयरमैन को तुरंत बर्खास्त कर 3 करोड़ हरियाणावासियों में से किसी हरियाणवी को HPSC चेयरमैन नियुक्त किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी तो हमने सोनीपत में रेल कोच फैक्ट्री, महम- भिवानी-हांसी के बीच में इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट मंजूर कराए जिससे हरियाणा के लाखों युवाओं को रोजगार मिलता। लेकिन ये प्रोजेक्ट बीजेपी की हरियाणा सरकार की कमजोरी के कारण दूसरे प्रदेशों में चले गए। अब अगर हरियाणा की ज्यादातर सरकारी नौकरियों में भी बाहर के बच्चे लगेंगे तो हरियाणा के बच्चे कहाँ जायेंगे? उन्होंने कहा कि जिस राज्य में हिंदी के अलावा राज्य की अलग भाषा है, वहां भाषा का पेपर अनिवार्य किया गया है, जैसे महाराष्ट्र में मराठी, तमिलनाडु में तमिल, पंजाब में पंजाबी। लेकिन हरियाणा की मुख्य भाषा हिंदी होने के कारण यहां भाषा के आधार पर अलग पेपर नहीं हो सकता। लेकिन बीजेपी सरकार राजस्थान से सीख सकती है। जैसे राजस्थान की भाषा भी हिंदी है, इसलिए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए अलग प्रावधान किया गया है और भर्ती परीक्षाओं में 30 से 40 प्रश्न राजस्थान GK के अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। पंजाब में पंजाबी भाषा के अतिरिक्त पेपर के अलावा 20% प्रश्न पंजाब GK के पूछे जाते हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश में राज्य GK 33% तक है। गुजरात में 1995 से एक गवर्नमेंट रेजोल्यूशन लागू है। इसके तहत निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। गुजरात के उद्योगों में 85% वर्कफोर्स (श्रमिक स्तर) और 60% मैनेजरियल पदों पर स्थानीय लोगों की नियुक्ति अनिवार्य है। कांग्रेस सरकार के दौरान राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में बताया था कि 2012 से 2022 तक RPSC की भर्तियों में अन्य राज्यों के लोगों को मात्र 1 प्रतिशत नौकरियां मिलीं (यानी 99% भर्तियां स्थानीय युवाओं की हुईं)। इसी तरह राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग में भी 99% से ज्यादा स्थानीय युवाओं को ही भर्ती किया गया, जबकि बाहरी राज्यों के लोगों का चयन प्रतिशत सिर्फ 0.9% रहा। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में एचपीएससी के माध्यम से ज्यादातर बाहर के बच्चों की भर्ती हो रही है इतना ही नहीं खुद एचपीएससी के चेयरमैन भी बाहर के लगे हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या 3 करोड़ हरियाणावासियों में एक भी कोई ऐसा कोई नागरिक हरियाणा का नहीं मिला जो एचपीएससी चेयरमैन लग सके। हरियाणावासियों का एक साजिश के तहत हक भी मारा जा रहा है और जिन वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलता है उनके साथ भी बड़ा धोखा हो रहा है। हरियाणा के युवा डंकी रूट से पलायन कर रहे और हरियाणा में ग्रुप ए, बी की, सी की नौकरियों का पलायन दूसरे प्रदेशों में हो रहा है। हरियाणा के बाहर के प्रदेशों के बच्चों के चयन और आरक्षित वर्गों की सीट खाली छोड़े जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हरियाणा पावर यूटिलिटीज (HPU) में असिस्टेंट इंजीनियर AE/SDO भर्ती में 214 अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया जिसमें से केवल 29 हरियाणा के थे। हरियाणा के जो बच्चे यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा निकाल लेते हैं, वो हमारे खुद के एचपीएससी से असिस्टेंट इंजीनियर में क्यों नहीं आ पा रहे? दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि इससे पहले सिविल जज के चयन में 110 उसमें से 60 बाहर के, सिंचाई विभाग में 49 में से 28 हरियाणा से बाहर के उम्मीदवार थे। एसडीओ इलेक्ट्रिकल में 80 में से 69 बाहर के, केवल 2 ही हरियाणा के थे। इसी तरीके से टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में लेक्चरर में 153 में से 106 बाहरी उम्मीदवार चयनित हुए। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जिन वर्गों को आरक्षण से लाभ मिलना चाहिए था, उन वर्गों के साथ भी बैकडोर से बड़ा धोखा किया जा रहा है। इसका भी उदाहरण देते हुए बताया पिछले हफ्ते असिस्टेंट प्रोफेसर, इंग्लिश 613 में से कुल 151 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, बाकी पद खाली रहे। डीएससी वर्ग के साथ बड़ा अन्याय करते हुए 60 रिजर्व सीट्स में से केवल 1 का चयन किया गया, 35% और कई कंडीशंस की आड़ में बाकी खाली छोड़ दी गई। इसके विरोध में आज भी हमारे युवा कड़ाके की ठंडी में धरने पर बैठे हैं।

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