एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र । गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरुक्षेत्र में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्देशित क्षमता निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत “पर्यावरण शिक्षा एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, जैव विविधता, जल संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा,ताकि वे विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित कर सकें।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इस अवसर विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ॰ नीलू ढल एवं डाॅ॰ सुरेंद्र कौर सैनी उपस्थित रहीं। सर्वप्रथम डॉ॰ नीलू ढल जी ने पर्यावरण शिक्षा के महत्त्व, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, जल एवं ऊर्जा संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा विद्यालय स्तर पर अपनाई जा सकने वाली व्यावहारिक गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उदाहरणों एवं समूह-चर्चा के माध्यम से समझाया कि छोटी-छोटी आदतें—जैसे जल की बचत, प्लास्टिक का सीमित उपयोग एवं वृक्षारोपण—भविष्य में बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।तत्पश्चात् डॉ॰सुरेंद्र कौर सैनी जी ने 6Rs सिद्धांत(Reduce,Reuse,Recycle,Recover,Redesign,Remanufacture) और AQI (Air quality index) की अवधारणा से अवगत कराया। प्रश्नोत्तर सत्र में शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य श्री नारायण सिंह जी ने मुख्य वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। एक शिक्षक समाज का पथ-प्रदर्शक होता है, अतः उसका पर्यावरण के प्रति सजग होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी शिक्षकों से विद्यार्थियों में प्रकृति-प्रेम तथा संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित करने का आह्वान किया। शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।