एनडी हिन्दुस्तान
पंचकूला । राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला में पौष्टिकता, शुद्धता और पोषण से परिपूर्ण सात्विक आहार ‘अन्नम’ थाली के जरिये विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य जीवन का मंत्र परोसा। विद्यार्थियों ने घर की रसोई में प्रयोग होने वाली खाद्य सामग्री से स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए, जिनमें आयुर्वेदिक सिद्धांतों की झलक देखने को मिली, जोकि परिवर्तनशील मौसम में लाभकारी माने जाते हैं। सात्विक आहार थाली निर्माण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के साथ संस्थान के कर्मियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में तीशा ग्रुप ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया।आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा एवं डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में युवा पीढ़ी को फास्ट फूड के प्रति जागरूक करने के लिए सात्विक आहार थाली निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा राणा और डॉ. गरिमा गुप्ता की देखरेख में संपन्न हुई।प्रतियोगिता के दौरान तैयार की गई थालियों में आमतौर पर घर की रसोई में प्रयोग होने वाली दालें, मोटा अनाज, हरी सब्जियां, मौसमी फल, सलाद, अंकुरित अनाज के साथ पारंपरिक भारतीय व्यंजन तैयार किए गए, जो शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।सात्विक आहार प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शामिल शालाक्य तंत्र विभाग से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गरिमा गुप्ता, रचना शारीर विभाग से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा, रस शास्त्र एवं भेष्जय कल्पना विभाग से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. समित मसंद और क्रिया शारीर विभाग से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रितेश ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। इसके साथ ही, विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए व्यंजनों के बारे मौसम परिवर्तन में लाभकारी की जानकारी ली, जिसके आधार पर विजेता प्रतिभागियों का फैसला लिया गया। प्रतियोगिता में तीशा ग्रुप ने उत्कृष्ट व्यंजन तैयार किए, जिसके आधार पर ग्रुप ने प्रथम स्थान हासिल किया। इसके साथ ही अनुष्का ग्रुप और स्वाति ने संयुक्त रूप से दूसरा स्थान हासिल किया।डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के संस्थान द्वारा आयोजित की गई सात्विक आहार प्रतियोगिता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां योग और आयुर्वेद के मूल संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। योग और संतुलित आहार एक-दूसरे के पूरक हैं। केवल योगाभ्यास ही नहीं, बल्कि सही खानपान भी स्वस्थ जीवनशैली की आधारशिला है।प्रोफेसर प्रह्लाद रघु ने कहा कि आयुर्वेद में भोजन को औषधि के समान महत्व दिया गया है और स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध, ताजा एवं संतुलित आहार को सर्वोत्तम माना गया है। सात्विक आहार न केवल शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, बल्कि मन को शांत, स्थिर और सकारात्मक बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।योग समिति के चेयरमैन एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. समित मसंद ने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, बढ़ती भागदौड़ और फास्ट फूड की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण अनेक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में युवाओं को भारतीय परंपराओं और आयुर्वेद आधारित खानपान के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। प्रतियोगिता समन्वयक डॉ. आकांक्षा राणा और डॉ. गरिमा गुप्ता ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों और कर्मियों की सराहना करते हुए आयुर्वेद और सात्विक आहार को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रितेश ने कहा कि सात्विक आहार प्रतियोगिता संबंधित आयोजन युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेदिक जीवनशैली और स्वस्थ भारत के संकल्प से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनूप एम, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पूजा हसन जी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धवल जी मकवाना, असिस्टेंट प्रोफेसर महेश एम और असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्र मोहन प्रमुख रूप से मौजूद रहे।