बेंगलुरु की प्रतिनिधि सभा के आखिरी दिन हुआ चुनाव,पांच नये सह सर कार्यवाह
न्यूज डेक्स इंडिया
दिल्ली। कर्नाटक के शिवमोगा जिला के सोरब में जन्मे, 65 वर्षीय अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर दत्तात्रेय होसबले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘सर कार्यवाह’ के रूप में चुने गए हैं। बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में चल रहे प्रतिनिधि सभा की बैठक के आखिरी दिन राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) के नए सर कार्यवाह का चुनाव हुआ,जिसमें होसबले को अगले तीन वर्षों के लिए सर कार्यवाह चुना गया है,अब वे वर्तमान सरकार्यवाह भैयाजी जोशी का दायित्व संभालेंगे।
इसी के साथ आरएसएस की इस नई टीम में पांच सह-सर कार्यवाह बनाये गये हैं। इसमें डॉ. कृष्ण गोपाल, मुकुंद सीआर, डॉ. मनमोहन वैद्य, रामदत्त,प्रोफेसर अरुण कुमार के नाम शामिल हैं हैं। डॉ. कृष्ण गोपाल, मुकुंद सीआर और मनमोहन वैद्य इससे पहले भी यही जिम्मेदारी देख रहे थे,जबकि प्रोफेसर अरुण कुमार और रामदत्त नये सह-सर कार्यवाह बनाए गए हैं।
संघ के सह-सरकार्यवाह की जिम्मेदारी से सुरेश सोनी को मुक्त किया गया है। उन्हें अखिल भारतीय कार्यकारिणी में स्थान मिल,जबकि सह-संपर्क प्रमुख का दायित्व संभाल रहे रामलाल अब अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख का दायित्व संभालेंगे,उन्हें पदोन्नत किया गया है। सुनील आंबेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख बने हैं और रोमेश पप्पा तथा आलोक को अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख बनाया गया हैं। वहीं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के क्षेत्र प्रचारक का दायित्व महेंद्र संभालेंगे।
काबिलेगौर है कि वर्तमान सरसंघचालक डा. मोहन भागवत भी सरकार्यवाह की भूमिका पहले निभा चुके हैं। निवर्तमान सरकार्यवाहक भैय्याजी जोशी हैं। भैय्याजी जोशी पिछले दो दशक से ज्यादा समय से इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। इस बार उनका होता तो वह पांचवीं बार इस पद पर विराजमान होते।
सरकार्यवाह का कार्यकाल 3 सालों का होता है। आरएसएस में हर तीन साल पर सरकार्यवाह पद का चुनाव होता है। यह संगठन में कार्यकारी पद होता है। यह संघ में नंबर दो का पद है। इससे ऊपर संरसंघसंचालक होते है। संरसंघसंचालक का पद मार्गदर्शक का होता है। संघ के नियमित कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी सरकार्यवाह की होती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में अब तक कुल 9 सरकार्यवाह रह चुके हैं। आरएसएस में अभी तक सरकार्यवाह की जिम्मेदारी निभाने वालों में प्रमुख नाम माधव राव सदाशिवराव गोलवलकर उर्फ गुरुजी का है, जो बाद में संघ प्रमुख भी बने। इनके अलावा भैयाजी दानी, एकनाथ राणाडे, माधव राव मूले और बाला साहेब देवरस उपाख्य दत्तात्रेय देवरस भी सरकार्यवाह के पद पर रह चुके हैं।
बाला साहेब देवरस उपाख्य दत्तात्रेय देवरस बाद में तीसरे सरसंघचालक भी बने। इनके अलावा रज्जू भैया उपाख्य डॉक्टर राजेंद्र सिंह भी सरकार्यवाह रहे हैं, जो बाद में आरएसएस के चौथे सरसंघचालक बने थे। उनके अलावा हो. वे. शेषाद्री भी सरकार्यवाह रहे हैं।
होसबले इससे पहले संघ के सह-सरकार्यवाह के पद पर थे। वह 2009 के बाद से ही संघ के सह-सरकार्यवाह रहे हैं। होसबले को 73 वर्षीय सुरेश भैय्याजी जोशी की जगह चुना गया है। भैय्याजी जोशी पिछले चार बार से सरकार्यवाह चुने जा रहे थे।
दत्तात्रेय होसबले 1968 में 13 वर्ष की आयु में स्वयं सेवक बने थे। साल 1972 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और अगले 15 वर्षों तक एबीवीपी के संगठन महामंत्री रहे। होसबले की जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही,जिसकी वजह से करीब पौने दो साल तक ‘मीसा’ के तहत जेल में रहे।होलबले के सरकार्यवाह बनने पर देश-दुनिया से सोशल मीडिया पर बधाइयां दी जा रही हैं।