Home haryana शहीद खुदीराम बोस मात्र 18 साल 8 महीने और 8 दिन की उम्र में हंसते हंसते फांसी के फंदे चढ़े-डा.मिश्रा

शहीद खुदीराम बोस मात्र 18 साल 8 महीने और 8 दिन की उम्र में हंसते हंसते फांसी के फंदे चढ़े-डा.मिश्रा

by ND HINDUSTAN
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क्रांतिकारी खुदीराम बोस मातृभूमि भारत के लिए हाथ में गीता लेकर हंसते-हंसते फांसी पर चढ़े थे- डॉ. श्रीप्रकाश


न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। आजादी की लड़ाई का इतिहास क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान के अनगिनत कारनामों से भरा पड़ा है। क्रांतिकारियों की सूची में ऐसा ही एक नाम है खुदीराम बोस का, जो शहादत के बाद इतने लोकप्रिय हो गए कि नौजवान एक खास किस्म की धोती पहनने लगे जिनकी किनारी पर खुदीराम लिखा होता था। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने अमर क्रांतिकारी शहीद खुदीराम बोस की शहादत दिवस के अवसर पर व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि खुदीराम बोस का जन्म बंगाल में मिदनापुर जिले के हबीबपुर गांव में हुआ था। 3 दिसंबर 1889 को जन्मे बोस जब बहुत छोटे थे तभी उनके माता-पिता का निधन हो गया। उनकी बड़ी बहन ने उनको पाला पोसा। 1905 में बंगाल विभाजन के बाद खुदीराम बोस मात्र 16 वर्ष की आयु में स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। क्रांतिकारी खुदीराम बोस मातृभूमि भारत के लिए हाथ में गीता लेकर हंसते-हंसते फांसी पर चढ़े थे।

डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि आजादी की लड़ाई में युवा क्रांतिकारियों की बड़ी भूमिका थी। उनमें से कई ऐसे थे जिन्होंने बेहद कम उम्र में ही अपनी जान न्योछावर कर दी। ऐसे ही क्रांतिकारियों में खुदीराम बोस का नाम भी शामिल है। 11 अगस्त 1908 को उन्हें केवल मात्र 18 साल 8 महीने और 8 दिन की उम्र में फांसी पर चढ़ा दिया गया था। जब उन्हें जज ने फांसी की सजा सुनाई, तब भी वह मुस्कुरा रहे। 13 जुलाई 1908 को जब उन्हें अदालत में सजा सुनाई जा रही थी तब जज ने उनसे पूछ लिया, सजा का मतलब समझते हो? बोस धीरे से मुस्कुराए और कहा, हां, मुझे सब समझ में आता है। मेरे वकील ने कहा कि मैं बहुत छोटा हूं इसलिए बम नहीं बना सकता। लेकिन अगर आप मुझे थोड़ा समय दें तो मैं आपको भी बम बनाना सिखा सकता हूं।

डॉ. मिश्र ने कहा कि आजादी के लिए अंग्रेजों पर पहला बम फेंकने वाले खुदीराम बोस सिर्फ क्रांतिकारी ही नहीं थे, बल्कि एक कुशल संगठनकर्ता भी थे। अंग्रेज सरकार उनकी निडरता और वीरता से इस कदर आतंकित थी कि उनकी कम उम्र के बावजूद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गयी। वह पूरी योजना के साथ कलकत्ता से मुजफ्फरपुर आये थे। उनका उद्देश्य जज किंग्सफोर्ड को मारना था। इसके लिए उन्होंने पूरी योजना बनायी थी। खुदीराम बोस की शहादत ने युवाओं में आजादी की एक नई अलख जगा दी थी। वीर खुदीराम बोस देश के प्रति त्याग, निष्ठा एवं समर्पण सदैव देश के लोगों को प्रेरणा देता रहेगा।

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