ऑनलाइन होंगे दाखिले,समाजशास्त्र प्रशासनिक सेवाओं में यूपीएससी, पीसीएस, एचसीएस की प्रतियोगिताओं में लोकप्रिय विषय
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। आज के शैक्षिक दौर में समाजशास्त्र विषय का महत्व सामाजिक अभियांत्रिकी (सोशल इंजिनियरिंग) के विषय के रुप में दिन प्रतिदिन अपना विस्तार बढ़ाता जा रहा है। समाज कल्याण, कार्य प्रशासन, ग्रामीण पुनर्निमाण, परिवार नियोजन, जनगणना, सामुदायिक सेवा कार्य व सामुदायिक कल्याण योजनाएं, ग्राम और नगर नियोजन आदि कार्यों में समाजशास्त्री अत्याधिक महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। कुवि के समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेम कुमार ने बताया कि व्यावसायिक दृष्टि से भी समाजशास्त्र का अत्याधिक महत्व है।
श्रम कल्याण अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी,सामाजिक शिक्षा अधिकारी, प्रोबेशन और पैरोल अधिकारी, परिवार नियोजन अधिकारी, जनजाति कल्याण अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी इत्यादि पदों पर आज समाजशास्त्र को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने बताया कि अध्यापन के साथ-साथ, समाजशास्त्र प्रशासनिक सेवाओं में यूपीएससी, पीसीएस, एचसीएस भी प्रतिभागियों द्वारा वैकल्पिक विषय के रूप पढ़ा जाने वाला सबसे लोकप्रिय विषय है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 11.7,15.4,15.5 व 15.8 के तहत समाजशास्त्र के महत्व को समझते हुए विषय को अनिवार्य रूप से सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में प्रारम्भ करने की सिफारिश की गई है।समाजशास्त्र विभाग के शिक्षक डॉ. सुनील ढुल ने बताया कि समाजशास्त्र विषय व्यापक रूप से स्कूल, स्नातक, परास्नातक व पीएचडी स्तर पर पढ़ाया जाने वाला एक सदाबहार विषय है।
वर्तमान में इस विषय की महत्ता इतनी बढ़ गई है कि यह केवल अपने समाज को ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर अन्य समाजों के साथ अंतरसंबंधों का भी व्यावहारिक ज्ञान करवाते हुए हमें परिवर्तनशील नवीन सामाजिक परिस्थितियों से अनुकूलन करने में मदद करता है। इस विषय का अध्ययन हमें आधुनिक जटिल समाज की विभिन्न सामाजिक समस्याओं जैसे-अपराध, बाल अपराध, आत्महत्या, वैश्यावृत्ति, भिक्षावृत्ति, बेकारी, गरीबी, डकैती इत्यादि जैसे गम्भीर सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन कर, उनके हल करने के आधारभूत सुझाव प्रस्तुत करता है। पारिवारिक जीवन की अनेक समस्याएं जैसे पारिवारिक बजट, कार्य विभाजन, बच्चों का पालन पोषण, जीवन साथी का चुनाव, पति-पत्नी का सह-अनुकूलन, वैवाहिक जीवन इत्यादि ऐसी जटिल समस्याओं को समझने के साथ उन्हें सर्वमान्य हल तक पहुंचाने का प्रयास करता है।
समाजशास्त्र के ज्ञान से समाज में अनुकूलन, सामंजस्य, सहयोग व सहिष्णुता स्थापित कर शत्रुता और वैमनस्य को समाप्त किया जा सकता है और युद्ध जैसी अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। हाल ही में कोविड-19 वैश्विक आपदा के बच्चों, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वृद्धों, प्रवासी मजदूरों और उद्यमियों सहित समाज के सभी वर्गों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव से उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों से निपटने हेतु सरकार व अन्य संस्थाओं के साथ-साथ, समाजशास्त्रियों की नवाचारी भूमिका और भी अधिक अपेक्षित हो गई हैं।कुवि के लोक सम्पर्क विभाग के उप-निदेशक डॉ. दीपक राय बब्बर ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के निर्देशानुसार समाजशास्त्र विभाग के पाठ्यक्रमों में ऑनलाइन दाखिले की प्रक्रिया 17 अगस्त से शुरू हो रही है तथा विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। स्नातकोत्तर समाजशास्त्र के पाठ्यक्रम में 60 सीटें निर्धारित है जिन पर विद्यार्थी दाखिला ले सकते हैं। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के निर्देशानुसार विद्यार्थियों की दाखिला सम्बंधी जानकारी के लिए ऑनलाइन हेल्पडेस्क भी गठित किया गया है। डॉक्टर दीपक राय बब्बर ने ये भी बताया की संबंधित विषयों के पीएचडी दाखिले भी 17 अगस्त से शुरू हो रहे है। ऑनलाईन एडमिशन से सम्बन्धित जानकारी के लिए विद्यार्थी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की वेबसाईट से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।