Home haryana हमेशा तन गए आगे जो तोपों के दहानों के, अपने प्राण देते हैं वो बेटे हैं किसानों के,मैं आग तम में लगाने चली आई हूं,पत्थरों को जगाने चली आई हूं…

हमेशा तन गए आगे जो तोपों के दहानों के, अपने प्राण देते हैं वो बेटे हैं किसानों के,मैं आग तम में लगाने चली आई हूं,पत्थरों को जगाने चली आई हूं…

by ND HINDUSTAN
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हरियाणा के शहीदों की कुर्बानियों की बदौलत मिली आजादीः प्रो. सोमनाथ सचदेवा

कुवि मे हरियाणा शहीदी दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। देश की आजादी में हरियाणा के शहीदों का महत्वपूर्ण योगदान है। हरियाणा में राव तुलाराम, चौ. उधमी राम, झज्जर के नवाब अब्दुर्रहमान, हांसी के लाला हुक्मचंद, अबदुशमद खान, मोहम्मद आजिम बेग, राव किशन सिंह, राव रामलाल, रामू जाट, सदरूदीन मेवाती, नवाब शमद खान सिरसा, राव गोपालदेव, इमाम कलंदरी व बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह सरीखे शहीदों के बलिदान को किसी भी सूरत में भुलाया नहीं जा सकता। आज का यह राष्ट्रीय कवि सम्मेलन हरियाणा के उन्हीं शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया है। यह उद्गार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बतौर मुख्यातिथि हरियाणा शहीदी दिवस की पूर्व संध्या पर युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहे।  

कुवि के आर. के. सदन में आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कवियों ने ऐसा समा बांधा कि राष्ट्र भक्ति की स्वर लहरियों से पूरा सदन गूंज उठा। फरीदाबाद से पहुंचे कवि दिनेश रघुवंशी ने राष्ट्र को नमन करते हुए कहा कि.. हमेशा तन गए आगे जो तोपों के दहानों के.. कोई कीमत नहीं होती है प्राणों की जवानों के.. बड़े लोगों की औलादें तो कैंडल मार्च करती हैं… जो अपने प्राण देते हैं वो बेटे हैं किसानों के…, दिल में उल्फत संभाल कर रखना… ये ईबादत संभाल कर रखना… लोग नफरत संभाल कर बैठे हैं… तुम मोहब्बत संभाल कर रखना। अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि अरूण जेमिनी ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते हुए कहा कि.. कोरोना काल के बाद पहला निमंत्रण मिला… निमंत्रण से मेरा रोम-रोम खुशी से खिला… दिल हो रहा था बेकाबू… महीनों बाद एक चुटकी कवि सम्मेलन मिलने की खुशी तुम क्या जानो दिनेश बाबू…।

प्रीति अग्रवाल ने राष्ट्र को वंदन करते हुए अपने देश भक्ति काव्य पाठ के माध्यम से खुब वाह-वाही लूटते हुए काव्य पाठ किया.. आग तम में लगाने चली आई हूं… रोशनी जगमगाने चली आई हूं… रोज सैनिक मरें… देश सोता रहे… पत्थरों को जगाने चली आई हूं…। डॉ. महेन्द्र शर्मा ने देश के शहीदों को नमन करते हुए उनकी आन में काव्य पाठ करते हुए कहा कि.. देश की खातिर सीमाओं पर जो जान गंवाते हैं… उनकी कुर्बानी को हम सब शीश नवाते हैं…।  

मास्टर महेन्द्र ने अपनी हरियाणवी रचनाओं दादी का घाघरा, चिट्ठी बनाम प्रेम पत्र के माध्यम से दर्शकों को लोट-पोट किया। उन्होंने काव्य पाठ करते हुए कहा कि.. मेरी दादी का घाघरा मेरी माँ की संदूक में धर्या है… मेरी दादी नै 12 साल हो लिए मरी नै… पर घाघरा आज भी नहीं मर्या है… इबकै बाबू सरपंच बणया तो खूब चालै पाटै… माँ नै जीते पाच्छै घाघरे म्ह तै सारे झंड़े बांटे…। हरियाणा शहीदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते हुए देशभक्ति का जो संदेश दिया वह हरियाणा के शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि रही।  

कार्यक्रम का संचालन निदेशक युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग डॉ. महासिंह पूनिया ने किया। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अनिल वशिष्ठ, अधिष्ठाता प्रो. शुचिस्मिता, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. कामदेव झा, उपाध्यक्ष डॉ. रामनिवास, चीफ वार्डन डॉ. नीलम ढांड़ा, कुटा प्रधान डॉ. परमेश कुमार, डॉक्टर ममता सचदेवा, कुटा सचिव डॉ. विवेक गौड, श्रीमती सुमिता शर्मा सहित काफी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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