कोविड-19 के बहाने किसान नेताओं को पीपली रैली पर जारी नोटिस का तीखा जवाब
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र,9सितंबर। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र आर्य दादूपुर ने कहा कि देश और प्रदेश में एक स्वर के साथ सभी किसान संगठनों के स्वामीनाथन की रिर्पोट के अनुसार ष्ट२+ ५०त्न फामूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद गारन्टी का कानून बनाने के लिए चौथे अध्यादेश की मांग हर गली चौपाल और प्रत्येक गांव तक अपना असर दिखाने लगी है। जिससे सरकार के पैरो के नीचे से जमीन खिसक गई है।
सरकार अपनी बौखलाहट में प्रदेश के किसानों को संघर्ष के लिए उकसा रही है। पूरे प्रदेश में अघोषित आपातकाल लगा हुआ है। सरकार इसे हटाये। कृषि में कॉरपोरेट सेक्टर के महामारी काल में किसान विरोधी प्रयोग 3 काले अध्यादेश को वापसी के लिए पीपली में आयोजित रैली को रोकने के लिए भाजपा सरकार बौखलाकर हर कायराना कदम उठा रही है। किसानों नेताओ के निवास पर नोटिस जारी कर दरवाजे पर भी स्थानीय पुलिस ने अलग से चिपका दिया है। व किसान नेताओं की पूरे प्रदेश में गिरफ्तारियां बददस्तूर जारी हैं।
संविधान में प्रदत्त किसी भी वर्ग को शांतिपूर्वक अपने विचार सांझा करते हुए सभा करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है जिस पर राज्य सरकार किसानों के ज्वलंत मसलों पर जवाब देने से बचते हुए तुष्टीकरण की नीति पर उतर आई है। बरोदा उपचुनाव में भाजपा के मंत्री सैकड़ों अधिकारियों कार्यकर्ताओं के साथ गांव-गांव करोना फैला कर मौतें बांट रहे हैं जिसमें नवनियुक्त भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, सांसद संजय भाटिया, कृषि मंत्री जे.पी. दलाल, की टीम में पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद भी अभियान लगातार प्रदेश में जारी है।
एक देश में दो सविधान दो कानून दो व्यवस्थाएं कदापि नहीं हो सकती। किसानों की रैली निश्चित समय पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होनी तय है जिसकी पुष्टि रैली संयोजक किसान कर चुके हैं। राज्य द्वारा मंडी कानून के तहत खरीद कानून को लागू किया जा सकता है लेकिन राज्य और केंद्र के बीच में तकनीकी आपत्ति लगाकर भाजपा जाजपा किसानों को धोखे में रख रही है। जबकि उपचुनाव में किसान हितों में खोखले दावे जोर-शोर से प्रचारित कर रही है।
किसानों के जनआंदोलन में कर्मचारी, आशा वर्कर, बर्खास्त शिक्षक, अन्य सामाजिक संगठनों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। बिना लिखित कोर्ट के नोटिस के किसी भी पुलिस वाले को किसी किसान के घर पर बिना इजाजत प्रवेश का अपराधियों की तरह घर में घुसने की तर्ज पर लताड़ के साथ विरोध होगा। यदि किसी भी किसान को किसान रैली में अनुचित रुप से रोका गया तो प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन के संबंधित अधिकारी को पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश की अवमानना के साथ मानहानि के समानांतर विभागीय कार्रवाई के लिए भी किसान पीछे नहीं हटेंगे।
विधानसभा सत्र में हरियाणा किसान आयोग, राष्ट्रीय अपराध नियंत्रण ब्यूरो द्वारा किसान आत्महत्या ऊपर आंकड़ों को जानबूझकर सर्वोच्च सदन एवं जनता में रखने से परहेज कर रही है ताकि सरकार की गलत नीतियों से प्राण गवा चुके किसानों को न्याय से वंचित रखा जा सके। महामारी में योद्धा के रूप में घर से बाहर निकल कर देश को खाद्यान्न सुरक्षा देने वाले किसान के साथ कॉर्पोरेट के इशारे पर आरबीआई खजाने की लूट अपने चहेतों को करा कर सत्ता दल ने देशवासियों के साथ धोखा किया है। किसान विरोधी नीतियों का किसी भी सूरत में किसान प्रदेश और देश में लागू नहीं होने देंगे।