हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से शोध कार्य के लिए किया गया टीम का गठन
यमुनानगर कुरुक्षेत्र कैथल जींद सिरसा, फतेहाबाद व हिसार जिलों में सरस्वती नदी के किनारे प्राचीन समय में रहे पुरातात्विक स्थलों को भी खोजने का होगा प्रयास
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से प्रदेश की प्राचीनतम एवं पवित्र सरस्वती नदी के किनारे आदि बद्री से लेकर हिसार तक 11 से ज्यादा पुरातात्विक साईटस पर शोध का कार्य किया जाएगा। इस शोध कार्य को करने के लिए सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से एक टीम का गठन किया गया है। यह टीम बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच के नेतृत्व में शोध कार्य करेगी। इतना ही नहीं इन 11 साईटस के अलावा फतेहाबाद, हिसार, सिरसा के अलावा अन्य जिलों में नदी के किनारे नई साईटस को भी खोजने का प्रयास किया जाएगा।
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच बुधवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सरस्वती एक्सीलेंस शोध केन्द्र में अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे थे। इससे पहले उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच, शोध केंद्र के निदेशक डा. एआर चौधरी, बोर्ड के एसई अरविंद कौशिक, बोर्ड की शोध अधिकारी डा. दीपा के साथ-साथ अन्य अधिकारियों ने आदि बद्री से लेकर हिसार में हरियाण की सीमा तक पवित्र सरस्वती नदी के किनारे स्थित प्राचीन साईटस को लेकर चर्चा की। इस चर्चा के दौरान शोध कार्य के लिए एक टीम का भी गठन किया गया है। इस टीम में उपाध्यक्ष, डा. एआर चौधरी, एसई अरविंद कौशिक, बोर्ड की शोध अधिकारी डा. दीपा, पुरातत्व विभाग से डा. जगपाल, केयूके से डा. गोपाल प्रसाद, विद्या भारतीय संस्कृति शिक्षण संस्थान के निदेशक डा. रामेन्द्र सिंह सहित अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है।
बोर्ड के उपाध्यक्ष ने कहा कि सरस्वती नदी प्रदेश की सबसे प्राचीनतम, पवित्र नदी है, इस नदी को फिर से प्रवाहित करने के साथ-साथ इस नदी के किनारे प्राचीन साईटस को सरंक्षित करने का काम बोर्ड की तरफ से किया जाएगा। इन साईटस को संरक्षित करने के साथ-साथ शोध कार्य भी किया जाएगा। इस योजना का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। इस योजना के साथ सरस्वती नदी उदगम स्थल आदि बद्री, चनेटी स्तूप यमुनानगर, बाबैन के गांव भगवानपुर, इसेरगड बावड़ी थानेसर के जोगना खेड़ा, पिहोवा में गांव थाना, संगम तीर्थ अरुनाय कलयात कैथल में बालू, कुनाल, विराना, बनवाली, राखीगढ़ी, सिसवाल, कर्णपूरा आदि साईटस का चयन किया गया है। इसके अलावा सरस्वती नदी के निकट जैसे हर्ष का टिल्ला, शेखचेहली का मकबरा आदि को भी संरक्षित करने का काम किया जाएगा। इसके साथ ही हिसार, सिरसा, फतेहाबाद सहित अन्य जिलों में सरस्वती नदी के किनारे प्राचीनतम नई साईटस को भी खोजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि बोर्ड की तरफ से इन सभी साईटस का पवित्र सरस्वती नदी के साथ क्या संबंध रहा, यह स्थल कैसे और कब विकसित हुए और इन साईटस पर क्या नया शोध कार्य किया जाए, जैसे विषयों को जहन में रखकर बोर्ड की तरफ से गठित टीम द्वारा शोध कार्य किया जाएगा। बोर्ड की योजना है कि इन सभी साईटस को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित किया जाए ताकि लोग इन स्थलों का अवलोकन करके हरियाणा की प्राचीन संस्कृति और इतिहास को अपनी आंखों से देखकर जान सके। इन प्रयासों को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने का काम किया जाएगा। इन साईटस पर शोध कार्य करने की भी रुपरेखा तैयार कर ली गई है। इस शोध कार्य को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आदेशानुसार और हरियाण के पर्यटन मंत्री कंवरपाल गुर्जर के मार्गदर्शन में किया जाएगा।