लाल बहादुर शास्त्री ने नोटिस किया था कि उनके एक दोस्त के पैर छूते समय अनिल के हाथ घुटने तक पहुंचे
अनिल शास्त्री ने मीडिया को एक साक्षात्कार में बताया थआ कि पिता का सिखाय वो सबक जीवनभर के लिए गांठ बंध गया
न्यूज डेक्स इंडिया
दिल्ली। सत्ता की हनक में सनसनी पैदा करने वाले अनेक घटनाक्रमों से देश की जनता रू ब रू हुई हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत राजघरानों युग समाप्त हुआ और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल हुई। मान्यता है कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन (भगवान) है और चुनावी प्रक्रिया में जनता के आशीर्वाद से विजयश्री प्राप्त करने वाला सेवक। भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जनता जनार्दन और उनके सेवक के बीच रिश्ता किसी से छुपा नहीं है। यह जगजाहिर हैं कि इस व्यवस्था में सेवक की स्थिति दयनीय है या भगवान की। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता से जु़ड़े बड़े और छोटे कई नेताओं और इनके परिवारों-रिश्तेदारों की हनक सनक पर कई किस्से-कहानियां,मीडिया की सुर्खियां और अनगिनत फिल्में बन चुकी।
सत्ता पर काबिज कई दिग्गजों और उनके परिवार से जुड़े किस्से जो सुकून देते हैं,अगर उसकी चर्चा ना हो तो बेमानी होगा। सूचना क्रांति के दौर में बाहर से लेकर अंदर तक की खबरों का संसार नित रोज गढ़ा जाता है। फिर भी कई अच्छे घटनाक्रम, जिनकी चर्चा जितनी हो,कम होगी। नकारात्मक खबरों के बीच सकारात्मक खबरों की जगह निस्संदेह आवश्यक भी है। ताजा किस्सा भारत सरकार के कद्दावर मंत्री नितिन गडकरी के पौत्र निनाद से संबंधित है। दरअसल बात यह है कि गड़करी के पौत्र निनाद एक फोटो की वजह से अचानक सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए। फोटो में एक बालक, एक प्रौढ़ अवस्था के व्यक्ति को साष्टांग नमस्कार कर रहा है। दोनों के चेहरे फोटो में दिखाई नहीं देते। वास्तव में जो बालक साष्टांग प्रणाम कर रहा है वो है भारत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का पौत्र निनाद, जबकि स्नेहपूर्वक पूरा नीचे झुककर इस बालक को आशीर्वाद देते हुए अपनी बाहों में भरने का प्रयास कर रहे प्रौढ़ावस्था के व्यक्ति है भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। यानी यह चित्र दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के दो पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों के पारिवारिक संस्कारों को इंगित कर रहा है। चित्र उस मौके पर लिया गया जब निनाद ने उपनयन संस्कार के अवसर पर घर पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आशीर्वाद लेने के लिए साष्टांग अभिवादन किया।सोशल मीडिया पर इस चित्र को खूब सराहना मिल रही है।
इस चित्र में समझने वाली दूसरी बात छिपी है वो कि संस्कार व्यक्ति को किस दिशा में ले जाते है,जबकि राजनीतिक हस्तियों के बिगडैल बच्चे क्या गुल खिलाते हैं, यह देश के अलग अलग हिस्सों में पूर्व की अनगिनत वारदातों से सर्वविदित है।गडकरी के पौत्र और रक्ष मंत्री की फोटो में भारत की उस उपनयन संस्कार की परंपरा का निर्वहन हो रहा है,जो महानगरों और सभ्रांत परिवारों में लगभग अब लुप्त प्रातः हो चुकी है। इसी तरह का फोटो पिछले दिनों दक्षिण भारतीय और बालीवुड सिनेमा के नामचीन अभिनेता आर माधवन और उनके पुत्र को भी खूब सुर्खियां मिली थी। वो फोटो उस वक्त ज्यादा सुर्खियों आया था,जब कोरोना के दौरान कई दिग्गज फिल्म अभिनेता और अभिनेत्रियों के शोना मोना नशे के चंगुल में जकड़े रेव पार्टियों,होटलों और डांस क्लबों से पकड़े गए थे। यदि सबक देने के लिए बुरे प्रकरण और अच्छे घटनाक्रम की मीडिया रिपोर्ट बन सकती है को ताजा फोटो के साथ दशकों पुराने एक ओर सबक देने वाले घटनाक्रम की क्यों नहीं।
गड़करी के पौत्र के जमाने में सूचना तंत्र इतना तीव्र है कि कुछ भी घटनाक्रम हो उसकी रफ्तार काफी तेज है।यदि सात दशक पहले यही सिस्टम होता तो शायद पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के सुपुत्र अनिल शास्त्री का किस्सा भी सुर्खियों में रहता। अपने पिता से जुड़े संस्मरणों पर चर्चा करते हुए एक मर्तबा अनिल शास्त्री ने मीडिया को दिए साक्षात्कार में बताया था कि एक बार रात के भोजन के पश्चात उनके पिता ने उन्हें बुलाकर कहा कि मैं देख रहा हूं कि आप अपने से बड़ों के पैर ढंग से नहीं छूते,क्योंकि लाल बहादुर शास्त्री के एक मित्र के पैर छूते समय अनिल की यह बात उनके पिता ने नोटिस की थी। पिता ने अनिल को बताया कि आप के हाथ पैर छूते समय आदरणीयों के घुटनों तक ही जाते हैं,जबकि परंपरा पांव छूने की है, घुटने नहीं। अनिल बताते हैं कि पिता के बोल सुनते ही उन्होंने बचाव करते हुए अपने जवाब में कहा कि आपने शायद मेरे भाइयों को ऐसा करते हुए देखा होगा। इस पर शास्त्री जी झुके और अपने 13 साल के बेटे के पांव छूकर बोले कि इस तरह से बड़ों के पांव छूने होते हैं। इस पर अनिल शास्त्री की आंखों से आंसू छलक आए और उसके बाद पिता के सबक को जीवनभर के लिए में गांठ बांध लिया।
