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भारतीय दर्शन के प्रकाण्ड विद्वान डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा का देहावसान 

by ND HINDUSTAN
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डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा जी का जीवन वृत्त

न्यूज़ डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र । विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के शोध निदेशक, भारतीय दर्शन के प्रकाण्ड विद्वान, शिक्षाविद्, कुरुक्षेत्र की एकमात्र विभूति, सभी विषयों के ज्ञाता के साथ-साथ उच्च कोटि के व्यक्तित्व के धनी सभी के आदरणीय डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा जी हमारे बीच नहीं रहे हैं। आज दिनांक 8 फरवरी को प्रातःकाल वे प्रभु चरणों में लीन हो गए हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने बताया कि संस्थान में आयोजित उनके जन्म दिवस समारोह में जारी किए गए जीवन यात्रा का परिचय इस प्रकार है:-
– कुरुक्षेत्र के एकमात्र विभूति डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा जिन्होंने 14-15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि को केन्द्रीय सचिवालय के नार्थ तथा साउथ ब्लाक से यूनियन जैक झण्डा उतरते तथा तिरंगा चढ़ते उसी स्थान पर प्रत्यक्ष देखा।
– उन्हें जागरण प्रकाशन प्रा.लि. ने एक भव्य समारोह में नगर के उत्तम नागरिक के रूप में गोल बैंक चौक पर सम्मानित किया।
– चण्डीगढ़ को छोड़ कर सारे उत्तर क्षेत्र का एकमात्र शिक्षाविद् जिनको भारत सरकार के सर्वोच्च संस्थान भारतीय दर्शन अनुसंधान परिषद का निरन्तर 4 वर्ष तक सदस्य रहने का सम्मान प्राप्त हुआ।
– उन्हें विभिन्न राज्यपालों द्वारा सम्मानित किया गया:- 
(क) समाज गौरव सम्मान – महामहिम राज्यपाल श्री ए.आर. किदवई के कर कमलों द्वारा राज्यभवन चण्डीगढ़ में। 
(ख) कंवर महेन्द्र सिंह बेदी अवार्ड – महामहिम राज्यपाल श्री जगन्नाथ पहाडिया द्वारा राजभवन चण्डीगढ़ में।
(ग) विशिष्ट साहित्यकार सम्मान – महामहिम राज्यपाल श्री जगन्नाथ पहाडिया के कर कमलों द्वारा राजभवन चण्डीगढ़ में।
(घ) विशिष्ट सम्मान – कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विशाल सभागार में गीता जयन्ती के अवसर पर महामहिम राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी जी द्वारा सम्मानित।
– उन्हें हरियाणा सरकार के सर्वोच्च साहित्य सम्मान फख्र-ए-हरियाणा से अलंकृत – मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर के कर कमलों द्वारा – हरियाणा के साहित्यकारों के विशाल सम्मेलन – चण्डीगढ़ में। साथ में 5 लाख रुपये की नकद राशि इनाम में प्राप्त।
– उनकी पुस्तक का विमोचन तत्कालीन केन्द्रीय गृह मंत्री सरदार बूटा सिंह द्वारा केन्द्रीय सचिवालय, नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के सभागार में गृह मंत्रालय के द्वारा किया गया और 70 व्यक्तियों को सचिवालय में प्रवेश पत्र द्वारा आमंत्रित किया गया।
– उनको भारत रत्न श्री गुलजारी लाल नन्दा, पूर्व प्रधानमंत्री, भारत सरकार के अभिनन्दन ग्रन्थ लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसका विमोचन तत्कालीन राज्यपाल के कर कमलों द्वारा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विशाल कक्ष में किया गया ।
– पूरे क्षेत्र में एकमात्र व्यक्ति जिन्होंने भारत के विख्यात विश्वविद्यालय भारती विद्या भवन, बम्बई से रामायण विशारद का कोर्स किया है। वह एक मात्र रामायण विशारद है।
– उनका नाम मध्य प्रदेश तुलसी अकादमी भोपाल से प्रकाशित भारत के विख्यात रामायण के विद्वानों की तुलसी निर्देशिका में चार स्थानों पर सम्मिलत किया गया है –
(क) तुलसी पर शोध पीएचडी तथा एम.फिल. कराने वाले (पृ. 105)
(ख) तुलसी मानस के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार करने वाले
(ग) मानस के प्रवचन कर्ता (पृ. 229)
(ग) मानस भारती रामायण विद्यापीठ तथा मानस प्रचार समिति द्वारा उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश में मानस का प्रचार-प्रसार करने वाले (पृ. 245)
(इसका सम्पादन बहुभाषिक रामकाव्य के अन्तरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. रमा नाथ त्रिपाठी ने किया है।) 
– उनका नाम बीसवीं शताब्दी के लब्ध प्रतिष्ठित व्यक्तियों की विशिष्ट परिचयावली में सम्मिलित किया गया है। (पृ. 487-488) (साउथ एशिया (ओवरसीज) पब्लिकेशन कम्पनी, दिल्ली (इण्डिया) से प्रकाशित), 1999
– उनका नाम अमेरिका के विख्यात विद्वान प्रो. कार्ल. एच. पौटर द्वारा संकलित तथा सम्पादित भारतीय दर्शन के विश्वकोश में सम्मिलित किया गया है।
– उनका नाम दर्शन तथा दार्शनिकों की अन्तरराष्ट्रीय निर्देशिका में सम्मिलित किया गया है जिसका संकलन तथा संपादन फिलास्फी डॉक्यूमैन्टेशन सैन्टर, बाउलिंग ग्रीन स्टेट यूनिवर्सिटी ओहियो (अमेरिका) द्वारा किया गया है।
– उनका नाम पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ के विख्यात प्रो. (डॉ.) एन. के. निझावन द्वारा संकलित तथा संपादित समाज शस्त्रियों की राष्ट्रीय पंजिका ( दिल्ली- मित्तल पब्लिशर्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा प्रकाशित) में सम्मिलित किया गया है।
– उनके पास रामायण तथा मानस से सम्बन्धित सहित्य का सबसे विशाल संग्रह है।
– उन्होंने आपातकाल में भूमिगत रहकर एक गुप्त पत्रिका ‘दर्पण‘ नाम से उस समय के दमनकारी शासक के विरुद्ध प्रकाशित की। इस पत्रिका के प्रभाव तथा महत्त्व को देखते हुए इस पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. हरभगवान बठला ने लघुशोध प्रबन्ध ‘‘पॉवर ऑफ प्रेस इन डैमोक्रेसी’’ नाम से प्रस्तुत किया जिस पर उनको एम.फिल. की डिग्री प्रदान की गई।
– उनको लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने अपनी संस्था ‘‘पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीस़’’ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया। उनके बाद भी दिसम्बर 1988 तक यह उस संस्था की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे।
– उनके यू-ट्यूब के ‘‘द क्वैस्ट’’ चैनल पर अब तक भारतीय दर्शन, पाश्चात्य दर्शन, सभी धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन, रामायण, राजनैतिक दर्शन, भारतीय संस्कृति आदि पर लगभग 800 से अधिक व्याख्यान/जिज्ञासा के समाधान आदि रिकार्ड हो चुके हैं जिनका विश्व भर में 3 करोड़ से अधिक लोग श्रवण कर चुके हैं।
– उन्होंने लगभग 35-40 विभिन्न लेखकों की काव्य संग्रह, कहानी संग्रह, निबन्ध-संग्रह आदि पुस्तकों पर प्रस्तावना लिखी है।
– उनको पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के बाबा फरीद सैन्टर फॉर सूफी स्ट्डीज की सलाहकार परिषद के सदस्य रहने तथा ईरान, तुर्किस्तान, सउदी अरब के सूफी विद्वानों से परामर्श का सौभाग्य प्राप्त है।
विशेष बात यह है कि 95वें जन्म दिवस के अवसर पर डॉ. हिम्मत सिंह ने अधिकृत रूप से यह विस्तृत परिचय स्वयं मुझे सौंपते हुए कहा था कि मेरा यह परिचय सभी को कराया जाए।

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