Home haryana पंजाबी मुख्यमंत्री को अभी तक पचा नहीं पा रहे हैं चौटाला,हुड्डा और प्रोफेसर वीरेंद्र-रमन मलिक

पंजाबी मुख्यमंत्री को अभी तक पचा नहीं पा रहे हैं चौटाला,हुड्डा और प्रोफेसर वीरेंद्र-रमन मलिक

by ND HINDUSTAN
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर गलत टिप्पणी करके ओछी राजनीति ठीक नहीं: रमन मलिक

अभी चौटाला ने की है टिप्पणी, इससे पहले सांसद दीपेंद्र हुड्डा, प्रो. वीरेंद्र ने भी उगला था जहर

न्यूज डेक्स हरियाणा

चंडीगढ़।  भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रमन मलिक ने कहा कि प्रदेश का समग्र और समान विकास कर रहे मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लेकर विपक्षी नेताओं द्वारा की गई और की जा रही गलत बयानबाजी प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयोग है। यह इन नेताओं का नया प्रयोग है। ऐसे नेताओं को जनता ही सबक सिखाएगी। पहले भी जनता ने ही इन नेताओं को सत्ता से बाहर बिठाया है। रमन मलिक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की तुलना आवारा पशु से करके अपनी ओछी मानसिकता का परिचय दिया है। उन्होंने उस पद की गरिमा भी नहीं रखी, जिस पद पर वे स्वयं रह चुके हैं। बेशक वे मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करके चंद लोगों की तालियां बटोर ले गये हों, लेकिन सामाजिक दृष्टि से उनका यह कथन बेहद ही भद्दा कहा जा रहा है। उन्हें अपनी इस बात पर माफी मांगनी चाहिए।

रमन मलिक ने कहा कि चौटाला से पहले दीपेंद्र हुड्डा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बारे में गलत बोला था। यह उनकी मनोहर लाल के विकास के मॉडल के प्रति नफरत की बात कही जा सकती है। वर्ष 2016 में कांग्रेस में ही हुड्डा के करीबी नेता प्रो. वीरेंद्र ने मुख्यमंत्री को पाकिस्तानी कहा था। ओलंपियन खिलाड़ी विजेंद्र सिंह बॉक्सर ने भी जातिवाद की राजनीति का सहारा लेते हुए बयान दिया कि गुड़ खाने वालों के साथ रहोगे या गुटका खाने वालों के। जहां एक तरफ  देश के प्रधानमंत्री ने इस शहादत को नमन करने के लिए विभाजन की विभीषिका आयोजन करने का नीतिगत फैसला लिया, वहीं पर ओम प्रकाश चौटाला दीपेंद्र हुड्डा प्रोफेसर वीरेंद्र और बॉक्सर विजेंदर सिंह जैसे लोग अपने मुंह से जहर उगलते हैं। देश को आजाद हुए 75 साल हो गए विभाजन हुए भी 75 साल हो गए, लेकिन आज भी कुछ लोगों के मस्तिष्क और हृदय में पल रही घृणा उनके जहन में बैठी है। ऐसे लोग अपने उम्र का भी लिहाज नहीं करते। 

इन नेताओं के बयानों से साफ झलकता है कि ये नेता हरियाणा की सत्ता पर पंजाबी मुख्यमंत्री को अभी तक पचा नहीं पाए गए हैं। उनके बारे में जहर उगलते आ रहे हैं। उनके बयानों में पंजाबी बिरादरी को उकसाने जैसी बातें हो रही हैं। पंजाबियों के खिलाफ नफरत, घृणा नजर आती है। विपक्ष के ये नेता राजनीति को जातिवाद की तरफ लेकर जा रहे हैं। जातिवाद का जहर प्रदेश में घोल रहे हैं। विकास की राजनीति की बातें इनके जहन में नहीं आती। ये प्रदेश के लोगों को भड़काने का असफल प्रयास कर रहे हैं।  

मलिक ने तीखे अंदाज में कहा कि बेशक यह पंजाबी वह लोग हैं, जो भारत के विभाजन की कीमत बनकर खर्चकर दिए गए थे। यह वह लोग हैं जिनके परिवारों में से 20-25 लाख लोगों को विभाजन की अग्नि में भस्म कर दिया था। अनगिनत माताएं बहने और बेटियों ने अपनी इज्जत बचाने के लिए जान दे दी। रमन मलिक ने कहा कि पंजाबी भले ही पाकिस्तान से आए हों, लेकिन उन्होंने यहां आकर कड़ी मेहनत करके खुद को स्थापित किया है। मेहनत-मजदूरी की है। हर छोटे से छोटा काम करके परिवार को पाला है। बंटवारे से पहले रईस थे और बंटवारा होते ही खाली हाथ आए। आज जो कुछ पंजाबियों के पास है, वह उनके पुरुषार्थ से कमाया हुआ है। किसी ने भी कोई खैरात नहीं दी है। ना ही पंजाबियों ने कभी लेने की भावना रखी। मलिक ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शपथ लेने के साथ ही यह साफ कर दिया था कि वे हरियाणा की जनता के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री बने हैं। सर्व समाज को साथ लेकर वे चलेंगे। ऐसा उन्होंने किया भी। पूरे राज्य में बराबर विकास के काम किये। कहीं से भी उन पर आज तक जातीय भेदभाव के आरोप नहीं लग पाए हैं। आठ साल की सरकार में उन्होंने ना तो नौकरियों में कोई भेदभाव किया और ना किसी अन्य क्षेत्र में।

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