भारतीय सिनेमा के सुंदर हस्ताक्षर बिमल दा ने अपनी फिल्म नौकरी में दिया था सत्येन कप्पू को ब्रेक
मुंबई में जन्म, कुरुक्षेत्र गुरुकुल में पढ़ाई और पानीपत की रामलीला के मंच से इप्टा,स्टेज,सिनेमा और सीरीज
कुरुक्षेत्र के अभिमन्यु पुर (अमीन) में हुआ था सत्येंद्र शर्मा यानी बालीवुड के सत्येन कप्पू का विवाह
साभारःराजेश शांडिल्य की फेसबुक वाल से
एनडी हिंदुस्तान
चंडीगढ़। भारतीय सिनेमा के सुंदर हस्ताक्षर कहे जाने वाले बिमल राय की देन कहे जा सकते हैं सत्येन कप्पू। उनका आज जन्मदिन है। भले सत्येन कप्पू आज हमारे बीच में नहीं,लेकिन भारतीय सिनेमा की वे 390 फिल्में आज भी देखी जाती हैं,जिनमें सत्येन कप्पू ने शानदार अभिनय कौशल से दशकों तक दर्शकों को प्रभावित किया। कभी वह खलनायक,पुलिस इंस्पेक्टर,जज,पुलिस कमीश्नर,राजनेता तो कभी पिता,ताया और सैन्य अधिकारी सहित तरह तरह की भूमिकाओं में नजर आए। मगर शोले फिल्म में वे ठाकुर के नौकर की भूमिका में थे और इस फिल्म के रामलाल को आज भी याद किया जाता है।आज भी सोशल मीडिया पर शोले के रामलाल का मीम गाहेबगाहे सामने आ जाता है।
बताते हैं कि एक बार नाटक देखने इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) अध्यक्ष बिमल राय (बिमल दा) आए थे। यहां उन्होंने सत्येंद्र शर्मा का अभिनय देखा था और अपनी फिल्म नौकरी में पहली बार किशोर कुमार के साथ काम दिया था,लेकिन इसमें उनका एक ही सीन था,इसके बाद बिमल दा ने ही सत्येन कप्पू को अपनी फिल्म काबुलीवाला में बलराज साहनी के साथ दूसरा मौका दिया था। यह फिल्म करने के बाद सत्येन कप्पू दुबारा थिएटर से जुड़ गए और नाटकों में ही रंग जमाना जारी रखा। स्टेज पर उनकी प्रतिभा को देखते हुए ही उन्हें तीसरा मौका रणधीर कपूर की फिल्म जवानी दिवानी में मिला था। स्टेज के बाद बड़े पर्दे पर अपने अभिनय कौशल से सत्येन कप्पू ने दर्शकों को प्रभावित किया और एक के बाद एक उनकी 2006 तक 390 फिल्में और कई टीवी सीरीज़ में दिखाई दिए। इनके अलावा उन्होंने प्रादेशिक सिनेमा में भी जमकर काम किया। वहीं 80 दशक में बनी हरियाणा की प्रसिद्ध फिल्म धन पराया में भी सत्येन कप्पू नजर आए थे।
सत्येन कप्पू की जड़े हरियाणा प्रांत से जुड़ी हैं,लेकिन साल 1931 में उनका मुंबई में हुआ था। बचपन में ही माता पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद उनका बचपन पानीपत और कुरुक्षेत्र में बीता। भारत की आजादी से पहले उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा संस्कृत में कुरुक्षेत्र गुरुकुल में की। बचपन से ही अभिनय में रुचि होने के कारण सत्येन कप्पू ने पानीपत में रहते हुए रामलीला और कई मंचीय कार्यक्रमों में अलग अलग भूमिकाएं निभाई थी। इसके बाद वे वापस मुंबई चले गए और वहां जाकर इप्टा से जुड़े।
सत्येन कप्पू आखिरी सांस तक यह स्वीकार करते थे कि उन्हें जीवन जीना,बोलना और अभिनय की कला को बारीकी से सीखने के गुर इप्टा ने ही सिखाए। और इप्टा ने ही उनका स्टेज से सिल्वर स्क्रीन तक पहुंचाने का रास्ता प्रशस्त किया था।उन्होंने हमेशा अपनी सफलता का श्रेय इप्टा को दिया,मगर वह अपने गुरुकुल कुरुक्षेत्र को भी कभी नहीं भूले। वर्ष 1987 में सत्येन कप्पू गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आए थे और उन्होंने तब अपनी बचपन की यादों को भी ताजा करते हुए बतौर पुरातन छात्र गुरुकुल कुरुक्षेत्र को 25 हजार की राशि भी भेंट की थी। भारतीय सिनेमा के इस दिग्गज कलाकार ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र को हमेशा याद रखा,क्योंकि वे मानते थे कि यहां सीखी संस्कृत की वजह से उन्हें कई स्टेज प्रोग्राम मिले थे। इसका जिक्र उन्होंने कई बार अपने साक्षात्कारों में भी किया।
करीब अभिनय को अपने जीवन के 50 से ज्यादा देने वाले सत्येन कप्पू भारतीय सिनेमा के प्रख्यात चरित्र अभिनेता रहे। उनकी शुरुआत भारतीय सिनेमा के ग्रेट एक्टर किशोर कुमार की फिल्म नौकरी से हुई थी। इसके बाद भारतीय सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना और दूसरे सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के अलावा अनेक दिग्गज फिल्म अभिनेताओं के साथ अलग अलग भूमिकाओं में नजर आए।उन्होंने 390 फिल्मों में काम किया था,लेकिन फिल्म शोले में ठाकुर के नौकर रामलाल और यश चोपड़ा की फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन के पिता की भूमिका के लिए उन्हें याद किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने नमक हलाल में मुख्य खलनायक और लावारिस सहित अन्य कई शानदार फिल्मों कटी पतंग,अनुराग,अमर प्रेम,यादों की बारात,खोटे सिक्के,डॉन,छोटी बहू,बेनाम,जंजीर,अविष्कार,मजबूर, काला पत्थर,अंगारे,मिस्टर नटवर लाल,रेडरोज,नया कदम,बिंदिया चमकेगी और राजेश खन्ना की बहुचर्चित फिल्म आज का विधायक राम अवतार में अपनी प्रतिभा से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
सत्येन कप्पू के बारे में 9 खास बातें
स्टेज से सिनेमा और सीरीज़ यानी टेलीविजन (धारावाहिकों) में अपने असली नाम सत्येंद्र शर्मा की बजाये सत्येन कप्पू नाम से पहचान मिली
अभिनय की दुनिया में उन्हें प्यार से सब सत्येन दा या कप्पू कहा जाता था
जन्म 7 फरवरी 1931 और निधन 27 अक्तूबर 2007 को निधन दिल का दौरान पड़ने से
विवाह 8 दिसंबर 1951 को कुरुक्षेत्र के एतिहासिक गांव एवं तीर्थ अभिमन्यु पुर (अमीन) वासी कैलाशवती से हुआ था
उनकी चार बेटियां हैं,उमा, विनिता, दृप्ति और तृप्ति
उनकी बेटी तृप्ति लेखन के क्षेत्र से जुड़ीं हैं और कई टीवी सीरियल कहानियां लिख चुकीं हैं
फिल्मों में पहला ब्रेक बिमल राय ने किशोर कुमार की फिल्म नौकरी में दिया था
2006 में संजय दत्त और तब्बू की फिल्म ‘सरहद पार’ उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई,इस फिल्म में वे बुजुर्ग सिख बनकर संजय दत्त के ताया की भूमिका निभाते नजर आए थे।