Home Kurukshetra News आंतरिक और बाह्य ताकत प्रदान करने में सबसे महत्वपूर्ण यंत्र है शिक्षा-डा. श्रीप्रकाश मिश्र

आंतरिक और बाह्य ताकत प्रदान करने में सबसे महत्वपूर्ण यंत्र है शिक्षा-डा. श्रीप्रकाश मिश्र

by ND HINDUSTAN
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मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा ग्रीष्मकाल में आस पास के जरूरतमंद बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए निःशुल्क शिक्षा एवं सामाजिक न्याय कार्यक्रम का शुभारंभ

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। शिक्षा सभी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सफलता और सुखी जीवन प्राप्त करने के लिए जिस तरह स्वस्थ्य शरीर के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, उसी तरह ही उचित शिक्षा प्राप्त करना बहुत आवश्यक है। शानदार और बेहतर जीवन जीने के लिए शिक्षित होना बहुत आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करके, शारीरिक और मानसिक मानक प्रदान करती है और जीवन  स्तर को सकारात्मक एवं परिमार्जित करती है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने आश्रम परिसर में ग्रीष्मकाल में आस पास के जरूरतमंद बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए निःशुल्क शिक्षा एवं सामाजिक न्याय कार्यक्रम के शुभारम्भ पर व्यक्त किये।

कार्यक्रम का शुभारम्भ भारतमाता के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पार्चन  दीप प्रज्जवलन से हुआ। कार्यक्रम में बच्चों ने राष्ट्र भक्ति से परिपूर्ण गीत एवं कविताएं प्रस्तुत की। डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का सबसे पहला उद्देश्य अच्छे नागरिक बनना और उसके बाद व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में सफल व्यक्ति बनना होता है। हम बिना अच्छी शिक्षा के अधूरे हैं क्योंकि शिक्षा हमें सही सोचने वाला और सही निर्णय लेने वाला बनाती है। इस प्रतियोगी दुनिया में, शिक्षा मनुष्य की भोजन, कपड़े और आवास के बाद प्रमुख अनिवार्यता बन गयी है। यह सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान प्रदान करने में सक्षम है: यह भ्रष्टाचार, आतंकवाद, हमारे बीच अन्य सामाजिक मुद्दों के बारे में अच्छी आदत डालने और जागरुकता को बढ़ावा देती है। शिक्षा एक व्यक्ति के लिए आन्तरिक और बाह्य ताकत प्रदान करने का सबसे महत्वपूर्ण यंत्र है। शिक्षा सभी का मौलिक अधिकार है और किसी भी इच्छित बदलाव और मनुष्य के मस्तिष्क व समाज के उत्थान में सक्षम है।

डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा शिक्षा व समाज का स्वरूप शिक्षा का नया प्रारूप समाज के स्वरूप् को बदल देती है क्योंकि शिक्षा ही समाज में परिवर्तन का साधन है। समाज प्राचीनकाल से आत तक निरन्तर विकसित एवं परिवर्तित होता चला आ रहा है क्येांकि जैसे-जैसे शिक्षा का प्रचार-प्रसार होता गया इसने समाज में व्यक्तियों के प्रस्थिति, दृष्टिकोण, रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाजों पर असर डाला और इससे सम्पूर्ण समाज का स्वरूप बदलता है l शिक्षा समाज के प्रति लेागों को जागरूक बनाते हुये उसमें प्रगति का आधार बनाती है। कार्यक्रम में आश्रम के सदस्य, शिक्षक, विद्यार्थी एवं अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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