मुख्यमंत्री की योजनाओं और मिलनसार व्यक्तित्व ने भी बनाया सकारात्मक माहौल
न्यूज़ डेक्स संवाददाता
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद से राजनीतिक समीकरण भाजपा के पक्ष में जाते दिख रहे हैं। हाल ही में विभिन्न एजेंसियों के ओपिनियन पोल में भाजपा को निर्णायक बढ़त दिखाई गई है। सर्वे में 38 फीसदी मतदाताओं का रूझान सत्ताधारी पार्टी भाजपा के पक्ष में है। वहीं कांग्रेस के लिए 23 फीसदी वोटर्स और इनेलो, आप सहित दूसरी पार्टियां बाकी वोटर्स को प्रभावित करती दिख रही है। जानकारों का मानना है कि यह अन्य दलों का वोट भी भाजपा के हक में जा सकता है। क्योंकि जब सर्वे में सवाल पूछा गया कि आप हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में किसे देखना चाहते हैं? तो सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में नायब सिंह सैनी 29 प्रतिशत वोटों के साथ शीर्ष पर हैं। जबकि विपक्षी वोट कई हिस्सों में दिख रहा है। यानि जब मुख्यमंत्री का चेहरा और काम देखकर मतदाता वोट देंगे, तो नायब सिंह सैनी के चेहरे और काम के नाम पर मतदाता भाजपा के पक्ष में जा सकते हैं।
अचानक बदले-बदले क्यों नजर आ रहे हैं राजनीतिक समीकरण
अभी कुछ माह पूर्व हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने राज्य की पांच लोकसभा सीटें हासिल कर ली थी। इसके बाद से हरियाणा में कांग्रेस खुद को सरकार बनाने की प्रबल दावेदार मान रही है। कांग्रेस में अभी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सांसद पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा बनाम अन्य कांग्रेस चलन में हैं। अन्य कांग्रेस में कुमारी शैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, चौधरी बीरेन्द्र सिंह जैसे नेता शामिल हैं। हुड्डा और अन्य कांग्रेस के फेर में हरियाणा में मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस का न होकर, हुड्डा बनाम अन्य कांग्रेस का हो गया है। इनमें से जो जीतेगा वह सांगठनिक शक्ति और लाभार्थी मॉडल वाली भाजपा से मुकाबला करेगा। कांग्रेस में अभी हरियाणा की 90 सीटों के लिए 2,556 प्रत्याशियों ने आवेदन किए हैं। जैसी कांग्रेस में गुटबाजी की संस्कृति है, एक सीट पर कांग्रेस का एक प्रत्याशी लड़ेगा और अन्य कांग्रेस के 28 से अधिक कार्यकर्ता एक-एक उम्मीदवारों को हराने का काम कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री का चेहरा बनाम चेहरा विहीन चुनाव
राज्य में एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने साढ़े नो साल मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में एक पंजाबी समाज के व्यक्ति को मुख्यमंत्री के रूप में अवसर दिया, वहीं एकाएक नए नेतृत्व के रूप नायब सिंह सैनी को पार्टी ने सत्ता के शीर्ष पर बैठा दिया। भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जो अचानक साढ़े नो साल में मुख्यमंत्री के ऊबाउपन वाले चेहरे को गायब रखने का मादा रखती है। भाजपा के इस नेतृत्व परिवर्तन से नई पीढ़ी नए चेहरे और ओबीसी समाज का नया नेता उभरा है। भाजपा के इस निर्णय को परखा, समझा, जांचा और मुख्यमंत्री बदला का फार्मूला माना जा रहा है। जहां सत्ता का हस्तान्तरण बिना किसी खींचतान के हो जाता है। नायब सिंह सैनी ही सीधे तौर पर वर्तमान मुख्यमंत्री होने के नाते भाजपा के मुख्यमंत्री पद के चेहरे दिख रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में सीएम की कुर्सी के लिए न चेहरा दिख रहा है, न ही व्यक्ति। कांग्रेस में गुट मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। जहां एक गुट रोहतक का कहलाता है, दूसरा गुट हिसार का। कांग्रेस की गुटबाजी में हरियाणा की लड़ाई की जगह नगर पंचायत क्षेत्र की लड़ाई अधिक दिखाई देती है।
भाजपा की नैया पार लगाता लाभार्थी मॉडल
हरियाणा में 10 साल से सत्ता पर काबिज बीजेपी के पास बूथ स्तर तक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार है। साथ ही सरकार संगठन में पंजाबी नेता की जगह ओबीसी नेतृत्व परिवर्तन करके भाजपा ने सत्ता के खिलाफ उठने वाली मंद हवाओं को शांत कर दिया है। भाजपा संगठन ने जहां एक तरफ मोहन लाल बड़ौली को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ब्राह्मणों को सांगठनिक भूमिका में बांधा है। वहीं नायब सिंह सैनी की 5 घोषणाएं भाजपा के लिए संजीवनी साबित हुई है। पहली घोषणा किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की है। दूसरी घोषणा से अग्नि वीर प्रतिभागियों को राज्य सेवा की नौकरियों में विशेष प्रावधान मिला है। तीसरी घोषणा कर्मचारी हित की है, जहां एक लाख कच्ची नौकरी वाले कर्मचारियों को स्थाई नौकरी (पक्की नौकरी) दी गई है। चौथी घोषणा उज्जवला योजना के 46 लाख से अधिक लाभार्थी परिवारों को ₹500 में मुफ्त सिलेंडर देने का फैसला है। पांचवी महत्वपूर्ण घोषणा शहरी क्षेत्रों में लाल डोरा संपत्तियों से संबंधित समस्याओं को हल करने का है। इसके लिए हरियाणा सरकार ने एक व्यापक रजिस्ट्री पहल शुरू की है। इन पांच प्रमुख घोषणाओं के साथ ही सरकार ने टीजीटी का सात साल रूके रिजल्ट को भी जारी करने का काम किया है। इन घोषणाओं के कारण ही सर्वे में भाजपा को बढ़त होती दिख रही है।