कुलपति बोले… किसान जलवायु के हिसाब से करेंगे औषधीय व संगधीय पौधों की खेती
एनडी हिन्दुस्तान
करनाल ।उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल नई सौगात लेकर आया है, क्योंकि एमएचयू किसानों को जलवायु के हिसाब से औषधीय व संगधीय पौधों पर रिसर्च कर नई तकनीक उपलब्ध करवाने की दिशा में काम करेगा। जिससे किसान भाईयों की आमदनी बढ़ेंगी ओर वे आर्थिक रूप से पहले की अपेक्षा ज्यादा संपन्न होंगे।
एमएचयू करनाल के माननीय कुलपति प्रो सुरेश मल्होत्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि ऑल इंडिया कोर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार से महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल को आईसीएआर से औषधीय व संगधीय पौधों पर रिसर्च करने के लिए डॉ. मनीष दास, निदेशक एवं समन्यक द्वारा भेजी गई सूचना अनुसार करनाल के उद्यान विश्वविद्यालय को औषधीय एवं सगंधीय विभाग को वलेन्टियर सेंटर घोषित किया है। जो उत्तर भारत के मैदानी इलाके की एकमात्र उद्यान विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। औषधीय व संगधीय पौधों पर शोध किया जाएगा, आज भी बहुत सारे रोगों का इलाज आयुर्वेदिक औषधीय के माध्यम से करते है, आयुर्वेदिक औषधीय बनाने के लिए बहुत सारे रॉ मटीरियल की आवश्यकता पड़ती है जैसे गिलोए, वकोपा, अश्वगंधा, तुलसी, कालमेद्य, सर्पगंधा, ब्रहमी आदि बहुत सारे औषधीय पौधे है, जिनकी आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए बहुत जरुरत पड़ती है। इसके साथ ही भारतवर्ष की दवा कंपनियों को कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो सकेगा, जो किसानों के लिए सोने पे सुहागा जैसा होगा। इससे लोगों में आयुर्वेदिक दवाओं का चलन ओर तेजी से बढ़ेगा।
हरियाणा की कृषि जलवायु के लिए उद्यान विश्वविद्यालय को चुना: प्रो. सुरेश
माननीय कुलपति प्रो. सुरेश ने बताया कि पूरे भारतवर्ष में अलग-अलग संस्थान प्रोजेक्ट के तहत काम कर रहे है। उसी तरह हरियाणा की कृषि जलवायु के लिए एमएचयू को चुना गया