कुरुक्षेत्र में आयोजित 48 कोस तीर्थ सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने की शिरकत
ब्रज की 84 कोसी यात्रा की तर्ज पर कुरुक्षेत्र में स्थित तीर्थों की यात्रा शुरू करने का प्रयास – मुख्यमंत्री
एनडी हिन्दुस्तान
चंडीगढ़ । हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार कुरुक्षेत्र को दुनिया का सबसे गौरवपूर्ण स्थान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन के बाद वर्ष 2016 से कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सोमवार को कुरुक्षेत्र में आयोजित 48 कोस तीर्थ सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम् के अध्यक्ष स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज के अलावा धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के विभिन्न तीर्थों के प्रतिनिधिगण तथा श्रद्धालुगण उपस्थित थे। इससे पहले, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा कुरुक्षेत्र के 48 कोस में आने वाले तीर्थों की जानकारी देने वाली पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
हुए कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लुप्तप्राय हो रहे तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखता है वह युवा पीढ़ी को अच्छे नैतिक संस्कार देता है। इसलिए हम वेदों, पुराणों व गीता की रचना स्थली हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर में लगभग 13 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से लगभग 40 फीट ऊंची विराट स्वरूप प्रतिमा पर स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में जन-जन की आस्था के विभिन्न केन्द्र स्थापित हो रहे हैं। देश के दूरदराज के क्षेत्रों में विद्यमान मंदिरों के दर्शन भी अब कुरुक्षेत्र में किये जा सकते हैं। हमने इन मंदिरों की स्थापना के लिए जमीन अलॉट की है।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के एकमात्र श्री तिरुपति बालाजी मन्दिर का निर्माण हो चुका है। इसके अतिरिक्त जीयो गीता संस्थानम, अक्षरधाम मंदिर, इस्कॉन मंदिर तथा ज्ञान मन्दिर का निर्माण भी किया जा रहा है। निश्चित तौर पर इन सभी संस्थाओं का निर्माण पूरा होने पर कुरुक्षेत्र को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी।
इस अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम् के अध्यक्ष ज्ञानानन्द महाराज ने गीता महोत्सव को सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण बताते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र के साथ-साथ महाभारत युद्ध की भूमि रही 48 कोस में राज्य सरकार का विकास का संकल्प सनातन में नए सूर्य के प्रकाश के सामान है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 48 कोस में आने वाले तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार करने का जो बीड़ा उठाया था, वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी सबके प्रति सद्भावना दिखाते हुए उसी संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।
कर रहे हैं ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अच्छी यादें लेकर जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर में लगभग 13 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से लगभग 40 फीट ऊंची विराट स्वरूप प्रतिमा पर स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में जन-जन की आस्था के विभिन्न केन्द्र स्थापित हो रहे हैं। देश के दूरदराज के क्षेत्रों में विद्यमान मंदिरों के दर्शन भी अब कुरुक्षेत्र में किये जा सकते हैं। हमने इन मंदिरों की स्थापना के लिए जमीन अलॉट की है।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के एकमात्र श्री तिरुपति बालाजी मन्दिर का निर्माण हो चुका है। इसके अतिरिक्त जीयो गीता संस्थानम, अक्षरधाम मंदिर, इस्कॉन मंदिर तथा ज्ञान मन्दिर का निर्माण भी किया जा रहा है। निश्चित तौर पर इन सभी संस्थाओं का निर्माण पूरा होने पर कुरुक्षेत्र को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी।
इस अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम् के अध्यक्ष ज्ञानानन्द महाराज ने गीता महोत्सव को सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण बताते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र के साथ-साथ महाभारत युद्ध की भूमि रही 48 कोस में राज्य सरकार का विकास का संकल्प सनातन में नए सूर्य के प्रकाश के सामान है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 48 कोस में आने वाले तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार करने का जो बीड़ा उठाया था, वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी भी सबके प्रति सद्भावना दिखाते हुए उसी संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।