लक्ष्मी बाई, भगत सिंह, शिवाजी व पृथ्वीराज चौहान की पगड़ी बनी आकर्षण का केन्द्र
संदीप गौतम/न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती के अवसर पर विरासत हेरिटेज विलेज जी.टी. रोड मसाना में आयोजित हरियाणा सांस्कृतिक दर्शन एवं हस्तशिल्प कार्यशाला में हरियाणा की पगड़ी के इतिहास को प्रदर्शित किया गया है। उल्लेखनीय है कि लोकजीवन में पगड़ी का सर्वोच्च स्थान है। लोकजीवन में पगड़ी को पगड़ी को पग, पाग, पग्गड़, पगड़ी, पगमंडासा, साफा, पेचा, फेंटा, खण्डवा, खण्डका, मंडासा, तुर्रा, मंडासी, साफा, रूमालियो, परणा, शीशकाय, जालक, मुरैठा, मुकुट, कनटोपा, पेचा, मदील, मोलिया और चिंदी आदि नामों से जाना जाता है, जबकि साहित्य में पगड़ी को रूमालियो, परणा, आदि नामों से जाना जाता है। वास्तव में पगड़ी का मूल ध्येय शरीर के ऊपरी भाग को सर्दी, गर्मी, धूप, लू, वर्षा आदि विपदाओं से सुरक्षित रखना रहा है, किंतु धीरे-धीरे इसे मान और सम्मान के प्रतीक के साथ जोड़ दिया गया। लोकजीवन में पगड़ी की विशेष महत्ता है।
पगड़ी की परम्परा का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। पगड़ी जहां एक ओर लोक सांस्कृतिक परम्पराओं से जुड़ी हुई है, वहीं पर सामाजिक सरोकारों से भी इसका गहरा नाता है। विरासत हेरिटेज विलेज में भारत की अलग-अलग पगडिय़ों के रंग देखने को मिल रहे हैं। विरासत में पगड़ी प्रदर्शनी में राजस्थानी पगड़ी, महाराजा अकबर की पगड़ी, लक्ष्मी बाई की पगड़ी, पंजाबी पगड़ी, मराठी पगड़ी, भगत सिंह पगड़ी, पठानी पगड़ी, शिवाजी पगड़ी, पृथ्वीराज चौहान पगड़ी, गंगाधर तिलक पगड़ी, हिमाचली पगड़ी, मुल्लादीन पगड़ी, शेख पगड़ी, बीरबल पगड़ी, मुनीम पगड़ी, हरियाणा की बृज, मेवात, खादर, बांगर, बागड़ की पगड़ी विशेष रूप से पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। इसके साथ ही पगड़ी बंधवाओ, फोटो खिंचवाओ आयोजन के माध्यम से भी हरियाणवी पगड़ी का प्रचार-प्रसार हो रहा है। विरासत हेरिटेज विलेज के स्वागत कक्ष में सभी का पगड़ी बांधकर स्वागत किया जाता है। हरियाणा की पगड़ी विशेष रूप से यहां पर प्रदर्शित की गई है। युवाओं में भी हरियाणवी पगड़ी की लोकप्रियता देखने को मिल रही है।