Home Kurukshetra News सौभाग्यशाली है कि अपने जीवन में राम मंदिर का निर्माण होते देख रहे हैं- डॉ आसींद शर्मा

सौभाग्यशाली है कि अपने जीवन में राम मंदिर का निर्माण होते देख रहे हैं- डॉ आसींद शर्मा

by ND HINDUSTAN
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जय श्री राम के उद्घोष के साथ 1990 में कानपुर में दी थी अपनी गिरफ्तारी

डॉ प्रदीप गोयल /न्यूज़ डेक्स संवाददाता

शाहाबाद। आरएसएस के वरिष्ठ नेता डॉ आसींद शर्मा का कहना है कि वह सौभाग्यशाली हैं कि अपने जीवन में राम मंदिर के निर्माण कार्य को पूर्ण होता देख रहे हैं और रामलला को गर्भ गृह में विराजमान होने के बाद दर्शन करने के अवसर मिल पाएगा। बता दे कि डॉ आसींद शर्मा 1990 में कारसेवकों के ग्रामीण जत्थे की अगुवाई कर रहे थे और कानपुर में जब खरींडवा निवासी महंत रामदास जी की गिरफ्तारी हुई तो उसके बाद जय श्री राम के उद्घोष के साथ उन्होंने अपनी गिरफ्तारी भी दी थी। साथ ही जितने अन्य कारसेवक उनके साथ गए थे उनकी भी गिरफ्तारी हो गई थी।

उन्होंने बताया कि उस समय वह आरएसएस के खंड कार्यवाह थे और उनकी अगुवाई में क्षेत्र का ग्रामीण जत्था गया था जबकि शहरी जत्थे की अगुवाई स्वर्गीय हर भगवान हंस कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वह 25 अक्टूबर को अंबाला छावनी के स्टेशन से ट्रेन में रवाना हुए थे और कानपुर पहुंचने के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई थी। जबकि शहरी जत्थे की गिरफ्तारी अगले स्टेशन उन्नाव में हुई थी। गिरफ्तार करने के बाद उनको केंद्रीय कारागार फतेहगढ़, जिला कानपुर ले जाया गया। जहां पर पहले ही हजारों की संख्या में कारसेवक मौजूद थे। उन्होंने बताया कि जेल में खाने की व्यवस्था तो ज्यादा अच्छी नहीं थी लेकिन बाद में कारसेवकों ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया था।

उन्होंने बताया कि जेल के अंदर भी सारा माहौल राममय था और हजारों की संख्या में सेवक श्री रामधुन की स्तुति करते थे और भजन संकीर्तन से पूरा दिन कैसे गुजर जाता था यह पता ही नहीं चलता था। उस समय वहां जेल में साध्वी ऋतंभरा, युग पुरुष परमानंद जी, भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दंतो पंत जी ठेगड़ी सहित अनेक महान हस्तियां मौजूद थी। जिनके प्रवचन भी प्रतिदिन सुनने को मिलते थे। 3 नवंबर को जेल के अंदर केरल से आए कारसेवकों की पिटाई के बाद जेल का माहौल काफी गर्म हो गया था जिसके बाद जेलर ने ही हाथ खड़े कर दिए थे और कहा था कि अब वह यहां पर व्यवस्था संभालने में असमर्थ हैं । इसके बाद कारसेवकों को रिहा कर दिया गया और सभी कारसेवकों को दिल्ली छोड़ दिया गया।

इसके बाद वह स्वयं अपने साधनों द्वारा शाहबाद पहुंचे थे। जहां उनका भारी स्वागत किया गया था। उन्होंने बताया कि यह हर्ष का विषय है कि उनके जीवन में ही अब उनका सपना पूरा होने जा रहा है और रामलला अपने गर्भ गृह में स्थापित होने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास मंदिर के दर्शनार्थ 8 फरवरी का न्योता मिला है लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह अभी नहीं जा सकते। लेकिन बाद में वह सह परिवार रामलीला के दर्शन करने अवश्य जाएंगे।

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