Home Chandigarh सांस्कृतिक कार्यक्रम “मेरु मुलुक मेरी पछ्यान” का आयोजन

सांस्कृतिक कार्यक्रम “मेरु मुलुक मेरी पछ्यान” का आयोजन

by ND HINDUSTAN
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फ़्योलडिया, त्वे देखिक, किंगर का झाला, घुघुती जैसे मधुर लोकगीतों पर श्रोताओं ने थिरकते हुए कार्यक्रम का आनंद लिया

एनडी हिन्दुस्तान

चंडीगढ़।  मेरु मुलुक.कॉम, उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और बोली भाषा को संरक्षित करने के लिए समर्पित एक प्रमुख वेबसाइट पोर्टल, ने समाज में आपसी मेलजोल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेक्टर 18 स्थित टैगोर थियेटर में सांस्कृतिक कार्यक्रम “मेरु मुलुक मेरी पछ्यान” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर, साहित्य, खेलकूद और समाज के अनछुए पहलुओं को जनमानस तक पहुँचाना था।

कार्यक्रम का आयोजन धीरेन्द्र नेगी, प्रीतम नेगी, और अजय गौड़ द्वारा किया गया, जो मेरु मुलुक.कॉम के संस्थापक सदस्य हैं और उत्तराखंड की सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रबल समर्थक हैं। उन्होंने इस मंच के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को बचाने और उसे आगे बढ़ाने के लिए अपने प्रयासों को साझा किया।  

इस सांस्कृतिक उत्सव में उत्तराखंडी लोक संगीत के प्रसिद्ध और लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुति दी गई। प्रमुख कलाकारों में शामिल थे उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक किशन महिपाल और अंजली खरे, जिन्होंने अपनी आवाज़ से कार्यक्रम में समां बांध दिया। उन्होंने उत्तराखंडी लोक गीतों का संगीतमय आनंद दिया, जिसमें सेमन्या बौजी, रानीखेता रामढोला, घुघुति, हो भाना रंगीली भाना, जै बद्री विशाल, और फ़्योलडिया, स्याळी बम्पालि, जैसे मधुर गीत गाए जिनका श्रोताओं ने थिरकते हुए भरपूर आनंद लिया। उनके गीतों ने श्रोताओं के दिलों को छुआ और एक पल के लिए सभी को उत्तराखंडी संस्कृति की गहरी जड़ों से जोड़ दिया।  

इस अवसर पर कलाकारों द्वारा उत्तराखण्डी लोकनृत्य भी प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

कार्यक्रम के आयोजक धीरेन्द्र नेगी, प्रीतम नेगी, और अजय गौड़ ने कहा कि यह आयोजन उत्तराखंडी समाज में आपसी मेलजोल और सामूहिक एकता को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। उनका मानना है कि जब तक हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हैं, तब तक हमारा समाज भी समृद्ध और सशक्त बना रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि मेरु मुलुक.कॉम का यह प्रयास केवल उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का नहीं, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाने का है ताकि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ सकें और उसे सहेजने का प्रयास करें।  

इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और उत्तराखंडी संगीत का आनंद लिया। आयोजन स्थल पर एक सकारात्मक और उत्साहपूर्ण माहौल था, जिसमें युवा और वृद्ध, सभी वर्गों के लोग उपस्थित थे।  

मंच का संचालन संतोष जोशी ने किया, जिन्होंने अपनी सटीकता से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

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