एनडी हिन्दुस्तान
करनाल। कृषि विभाग के उप निर्देशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि कुछ किसान धान फसल कटाई उपरांत बचें हुए अवशेषों में आग लगा देते है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है, भूमि की उर्वरता में कमी आती है इसके साथ-साथ जानमाल की हानि का डर भी बना रहता है। सरकार द्वारा फसल अवशेषों में आगजनी करने पर पूर्ण प्रतिबंध भी लगाया हुआ है।
उन्होंने बताया कि जिला करनाल में पिछले दो वर्षों से आगजनी की घटनाओं में लगभग 60 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। जिला प्रशासन के प्रयास प्रगतिशील किसानों के सहयोग से हरसेक से प्राप्त होने वाली लोकेशन जो कि खरीफ 2021 में 957 दर्ज की गई थी, खरीफ 2022 में घटकर 301 दर्ज की गई थी, खरीफ 2023 में केवल 126 व खरीफ 2023 में केवल 95% दर्ज की गई है। खरीफ 2023 में रेड जोन गाँवों की संख्या 10 व येनो जोन गाँवों की संख्या 53 थी जो घटकर खरीफ 2024 में रेड जोन गाँवों की संख्या 2 व मेलो जोन गाँवों की संख्या 24 रह गई है। जिनमे जागरूकता के लिए विशेष कैंप लगाये जाएंगे।
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा सभी गाँवों में किसानों के लिए जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाते है प्रत्येक गाव में मुनादी व धार्मिक स्थानों पर लाउड स्पीकर के माध्यम से जागरूक किया जाता है। स्कूल व कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के सहयोग से रैलिया व प्रभात फेरी निकाली जाती है। गाँवों वाईज व खंड वाइज सभी किसानों के 2 वॉट्सअप ग्रुप बनाये गये हैं व पिछले सालो में जिन किसानों द्वारा अपने खेतो में आगजनी की गई थी उन सभी से इस वर्ष अनुरोध किया जा रहा है कि वे इस वर्ष आगजनी न करे ।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देश अनुसार इस वर्ष फसल अवशेषों की आगजनी की घटनाओं में जीरो बर्निंग का लक्ष्य दिया गया है। इन आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए उपायुक्त उत्तम सिंह द्वारा गांव स्तरीय एनफोर्समेंट टीम का गठन किया जाता है जिसमे कृषि विभाग के अधिकारी / कर्मचारी, सम्बन्धित पटवारी व ग्राम सचिव सदस्य है। पशुपालन विभाग व बिजली विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों के अधिकारी कर्मचारी भी इस कार्य के लिए लगाए जाते है। उन्होंने बताया कि खरीफ 2024 में लगभग 300 अधिकारियों/ कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी जो आगजनी की घटनाओं को रोकने के साथ साथ नियमानुसार कार्यवाही भी अमल में लाते है। इन नियमों की अवहेलना करने वाले किसान पर मुकदमा दर्ज करवा कर जुर्माना वसूल किया जाता है। इसके साथ ही ऐसे किसानों की मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रिकॉर्ड में डाटा एंट्री की जाती है। जिसमे वह आगामी दो सीजन अपनी फसल मंडी में नहीं वेच पाता है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य में धान की कटाई करने के इच्छुक कम्बाईन हार्वेस्टर के मालिक कम्बाईन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाएंगें तथा हरियाणा राज्य में किसी भी कम्बाईन हार्वेस्टर को सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना धान की कटाई करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कटाई के बाद खुले खेत में धान की पराली जलाना राज्य और उससे सटे दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है और इस तरह की हरकतें मिट्टी और पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति पहुंचा रही है।
धान की कटाई प्रक्रिया के दौरान जब कम्बाईन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ा जाता है, तो धान के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जा सकता है, जिससे किसानों को धान के अवशेषों को जलाए बिना अपनी अगली फसल बोने में सुविधा होती है। जिससे किसान आगजनी नहीं करता है और वायु प्रदूषण नहीं होता है। उन्होंने बताया कि धान की कटाई करने वाले कम्बाईन हार्वेस्टर के मालिक कम्बाईन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवाना अनिवार्य किया जायेगा तथा जिला करनाल में किसी भी कम्बाईन हार्वेस्टर को सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना धान की कटाई करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने जिला के सभी कम्बाईन हार्वेस्टर मालिको से आग्रह किया जाता है कि वे सभी अपनी कम्बाइन हार्वेस्टर पर सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवा लें ताकि उनको सीजन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।