एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र ।शिक्षकों के सतत् व्यावसायिक विकास को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में कहानी कथन सीखने की प्रक्रिया का सशक्त माध्यम विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों द्वारा कक्षा को अधिक प्रभावी ,रोचक और बाल केंद्रित बनाने हेतु नवीन शिक्षण तकनीकों से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। विषय विशेषज्ञ के रूप में विद्यालय की आचार्या श्रीमती नेहा सचदेवा जी और श्रीमती सविता ग्राक जी उपस्थित रहीं। श्रीमती नेहा सचदेवा जी ने कहानी कहने की कला पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कहानी केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों की कल्पना शक्ति, संवेदनशीलता, तार्किक चिंतन और नैतिक मूल्यों को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि कठिन विषयों को कहानियों से जोड़कर प्रस्तुत करने से विद्यार्थी विषय को आसानी से आत्मसात् करते हैं और लंबे समय तक याद रखते हैं। श्रीमती सविता ग्राक जी ने शिक्षकों को समूह गतिविधियों, भूमिका निर्वहन एवं दृश्य- श्रव्य सामग्री के प्रयोग द्वारा कक्षा को जीवंत एवं सहभागी बनाने के व्यावहारिक तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने अरस्तु द्वारा बताए गए कहानी संरचना के मूलभूत तत्वों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कहानी-कथन विधा विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाती है और उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक होती है। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न विषयों से संबंधित कहानियों की रचना कर उनका प्रस्तुतीकरण किया। अतः कार्यशाला अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रही। इसने शिक्षकों को नई सोच व दृष्टिकोण प्रदान किया जिससे वे अपने विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन देकर उनके अधिगम को स्थायी रूप प्रदान कर सकेंगे। अंत में विद्यालय के प्राचार्य नारायण सिंह जी ने ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण हेतु दोनों विषय विशेषज्ञों का आभार प्रकट किया।
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