केरलम के शहरी और ग्रामीणांचल के 55 हजार मुस्लिम और 54 हजार ईसाई घरों तक पहुंचा
संघ-संघ के शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार,समाज संपर्क पर जोर और 46 में से 37 राज्यों तक पहुंच
एनडी हिन्दुस्तान/ राजेश शांडिल्य
चंडीगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार और समाज संपर्क पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शताब्दी वर्ष में सभी वर्ग-समुदाय के घरों तक संघ की पहुंच 46 में से 37 प्रांतों में हुए गृह सम्पर्क अभियान से हुई है। इस अभियान के दौरान 10 करोड़ घरों में सम्पर्क कर संघ के विषय में संवाद किया गया। संघ द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार केवल केरलम राज्य में 55 हजार मुस्लिम घरों और 54 हजार ईसाई घरों में पहुंच हुई है।रोचक पहलू यह है कि करीब एक लाख 9 हजार मुस्लिम और ईसाई घरों में संघ की पहुंच के दौरान इन परिवारों ने काफी उत्साह के साथ स्वयंसेवकों का ना केवल स्वागत-अभिनंदन किया,बल्कि इनमें भरपूर जिज्ञासा भी रही। दरअसल हरियाणा के समालखा स्थित माधव सृष्टि में संघ की 13 मार्च से तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा शुरु हो चुकी है।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने पत्रकारों को उपरोक्त जानकारी दी। इस अवसर पर उनके साथ संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर भी उपस्थित रहे।उन्होंने यह भी बताया कि देशभर से इस बैठक में 2400 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी हुई है। प्रातः नौ बजे प्रतिनिधि सभा का उद्घाटन सरसंघचालक डा.मोहनराव भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने किया।इसके साथ ही बैठक में प्रस्तुत संघ के प्रतिवेदन के अनुसार देश में अब तक 37,048 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है जिनमें लगभग साढ़े तीन करोड़ लोग शामिल हुए। यह सम्मेलन शहरी, ग्रामीण, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में भी आयोजित हुए हैं। इनमें प्रमुखता से समाज में सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों की पालना के लिए पंच परिवर्तन के लिए आह्वान किया गया।शताब्दी वर्ष के दो मुख्य लक्ष्य संगठन विस्तार और समाज जागरण तय किए गए हैं।इसके तहत व्यक्ति निर्माण के लिए शाखाओं की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। संघ के लिये संतोषजनक स्थिति इसलिए भी है,क्योंकि संगठनात्मक विस्तार की गति लगातार बढ़ रही है। संघ के प्रतिवेदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष देश के 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित हो रही थीं, जो अब बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 शाखाओं तक पहुंच गई हैं। इस प्रकार एक वर्ष के भीतर 3,943 नए स्थानों पर संघ का कार्य प्रारंभ हुआ है और शाखाओं की संख्या में 5,820 की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो संगठन के निरंतर विस्तार और बढ़ती सामाजिक सहभागिता को दर्शाती है।इसी क्रम में पंच परिवर्तन अभियान पर विशेष फोकस करते हुए पर्यावरण संरक्षण, परिवार मूल्यों के सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता और स्वदेशी भावना के प्रसार पर अभियान चलाए जा रहे हैं तथा ब्लॉक व जिला स्तर पर संवाद और गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं। संपर्क अभियान के तहत स्वयंसेवक 3 लाख से अधिक गांवों तक पहुंचे हैं।इस प्रेसवार्ता के दौरान मीडिया के सवालों का भी सह सरकार्यवाह ने उत्तर दिया। मीडिया के विभिन्न सवालों का जवाब देते हुए सह सर कार्यवाह ने कई मुद्दों पर संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट किया। मणिपुर की स्थिति पर उन्होंने कहा कि संघ पिछले लगभग 50 वर्षों से वहां सक्रिय है और मैतेई तथा कुकी समुदायों के बीच संवाद व समन्वय स्थापित कर समाज में विश्वास बहाली के प्रयास स्वयंसेवक लगातार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर उन्होंने कहा कि विदेश नीति से जुड़े निर्णय भारत सरकार करती है और संघ की कामना है कि वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित हो। सवालों के उत्तर में संगठनात्मक ढांचे में बदलाव पर उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में समय-समय पर आवश्यकतानुसार दायित्व परिवर्तन और संरचनात्मक बदलाव होते रहते हैं। मुस्लिम समाज से प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि संघ का कार्य हिंदू समाज के संगठन के लिए है। वहीं यूजीसी विवाद और दलित समाज के आंदोलनों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज में भेदभाव समाप्त कर सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है, ताकि सामाजिक और राष्ट्रीय एकता मजबूत बनी रहे।
देश के प्रख्यात महानुभावों को दी गई श्रद्धांजली
प्रारंभिक सत्र में देश और समाज के लिए कार्य करने वाले दिवंगत महानुभावों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इनमें पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. माधव धनंजय गाडगिल, पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल, कर्नाटक के शिक्षाविद् एन विनय हेगड़े, कर्नाटक की प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सालूमारदा थिमक्का, तमिलनाडु के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता और स्वतंत्रता सेनानी आर नल्लाकन्नू का पुरातत्वविद केएन दीक्षित,पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल,पूर्व डिप्टी सीएम अजित पंवार, फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र,तमिल सिनेमा के दिग्गज निर्माता एवीएम सरवन सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों को स्मरण किया गया।